PMCH नर्सिंग स्टाफ हड़ताल: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गईं। नर्सिंग स्टाफ के कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन के कारण अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर असर पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए जांच कमेटी का गठन किया है।
नर्सों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगें रखीं और आरोप लगाया कि उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान नर्सिंग कर्मियों ने दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में नर्सें अस्पताल परिसर में मौजूद रहीं और अपनी आवाज उठाती नजर आईं।
मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला सोमवार को एक मरीज अरविंद सिंह की मौत के बाद शुरू हुआ। बताया गया कि अरविंद सिंह PMCH में कार्यरत वरिष्ठ स्टाफ नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति थे।
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। इसी दौरान नर्सिंग स्टाफ और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए।
नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि विवाद के दौरान उनके साथ गलत व्यवहार किया गया और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर नर्सों ने काम का बहिष्कार शुरू कर दिया।

इमरजेंसी और ऑपरेशन सेवाओं पर पड़ा असर
नर्सों की हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला। अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई जरूरी सेवाओं के संचालन में परेशानी सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, इमरजेंसी सेवा, ऑपरेशन थिएटर (OT) और अन्य आवश्यक विभागों का काम प्रभावित हुआ। मरीजों के इलाज में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम शुरू किया।
PMCH जैसे बड़े अस्पताल में किसी भी तरह का व्यवधान हजारों मरीजों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यहां पटना के अलावा राज्य के कई जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
जांच के लिए बनी 7 सदस्यीय कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच का फैसला लिया है। PMCH अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि पूरे विवाद की जांच के लिए 7 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
इस कमेटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच समिति में अस्पताल के अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ एक वरिष्ठ नर्स को भी शामिल किया गया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

JDA ने भी किया हड़ताल का ऐलान
इधर, PMCH के जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने भी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।
JDA की ओर से कहा गया है कि हड़ताल के दौरान OPD, सामान्य वार्ड और ऑपरेशन थिएटर जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी सेवाएं, ICU, लेबर रूम और आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर को जारी रखने की बात कही गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में काम करने वाले चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए। वहीं, नर्सिंग स्टाफ भी अपनी शिकायतों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
PMCH में एक साथ नर्सों और जूनियर डॉक्टरों के विरोध के कारण अस्पताल प्रशासन के सामने सेवाओं को सामान्य बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।
अस्पताल में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच विवाद का असर सीधे मरीजों पर पड़ सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द विवाद का समाधान निकाला जाए और अस्पताल की सभी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें।

जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
फिलहाल पूरे मामले की जांच 7 सदस्यीय कमेटी कर रही है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विवाद के लिए कौन जिम्मेदार था और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
PMCH प्रशासन ने कहा है कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज उसकी पहली प्राथमिकता है। साथ ही, अस्पताल में अनुशासन और बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल PMCH में स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही नर्सों और डॉक्टरों के बीच चल रहा विवाद खत्म होगा, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो सकें।










