अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बिहार: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बिहार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में योग, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने योग के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली है जो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी और आम नागरिक शामिल हुए। इस दौरान सामूहिक योगाभ्यास भी किया गया और लोगों को नियमित रूप से योग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया योग के महत्व को स्वीकार कर रही है और भारत की इस प्राचीन परंपरा को वैश्विक पहचान मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि योग हजारों वर्षों से भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। यह केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि मन को शांत और संतुलित रखने का भी प्रभावी तरीका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई और अब यह विश्वव्यापी अभियान बन चुका है। वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां आयोजन इस बात का प्रमाण है कि योग के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग एक ऐसा माध्यम है जिसे अपनाने के लिए किसी विशेष संसाधन या आर्थिक खर्च की आवश्यकता नहीं होती। हर व्यक्ति अपने घर, विद्यालय, कार्यालय या किसी भी खुले स्थान पर योग कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च करती है, लेकिन यदि लोग नियमित रूप से योग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम होगा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में योग को स्कूलों के पाठ्यक्रम से जोड़ने की दिशा में गंभीरता से विचार किया जाएगा। उनका मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही योग का प्रशिक्षण मिले तो वे शारीरिक रूप से अधिक स्वस्थ, मानसिक रूप से अधिक मजबूत और पढ़ाई में अधिक एकाग्र हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में योग को नियमित गतिविधि के रूप में शामिल करने से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी मदद मिलेगी। इससे अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि योग शिक्षा केवल एक विषय नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी योग के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए योग सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। योग व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाता है, स्मरण शक्ति को मजबूत करता है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायता करता है। उन्होंने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में विद्यार्थियों और युवाओं के लिए योग अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।
निशांत कुमार ने कहा कि योग भारत की ओर से पूरी दुनिया को दिया गया एक अनमोल उपहार है। आज दुनिया के कई देशों में लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग न केवल बीमारियों से बचाव करता है, बल्कि व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम के दौरान कई वक्ताओं ने भी योग को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूल और कॉलेज स्तर पर योग को नियमित रूप से पढ़ाया जाए तो युवाओं में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ेगी और वे भविष्य में बेहतर जीवनशैली अपना सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों और नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। योग प्रशिक्षकों ने लोगों को विभिन्न आसनों और प्राणायाम की जानकारी दी तथा उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि योग केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवनभर अपनाई जाने वाली स्वस्थ आदत है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री दोनों ने लोगों से नियमित योग करने की अपील की और कहा कि स्वस्थ बिहार और स्वस्थ भारत के निर्माण में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की पहचान है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से योग को जन-जन तक पहुंचाया जा सकेगा और एक स्वस्थ, जागरूक एवं सशक्त समाज का निर्माण होगा।










