अररिया सावन सोमवारी: सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर अररिया शहर पूरी तरह भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबा नजर आया। सुबह होते ही शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। मंदिरों में हर-हर महादेव और हर-हर भोला के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर इस बार श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। शहर में सुबह करीब चार बजे से ही शिव भक्त मंदिरों की ओर पहुंचने लगे थे। कई श्रद्धालु हाथों में पूजा सामग्री, बेलपत्र, फूल और जल लेकर मंदिर पहुंचे। महिलाओं और युवाओं के साथ बुजुर्ग श्रद्धालुओं में भी भगवान शिव की पूजा को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया।
सुबह से ही अररिया के विभिन्न शिवालयों में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार और शिव स्तुति के बीच पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। कई मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया।

151 कन्याओं और महिलाओं ने निकाली जलाभिषेक यात्रा
सावन की अंतिम सोमवारी पर अररिया शहर के इटहरा वार्ड संख्या-07 स्थित शिव मंदिर से विशेष जलाभिषेक यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक यात्रा में 151 कुमारी कन्याओं और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। यात्रा में स्थानीय श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या मौजूद रही।
जलाभिषेक यात्रा के दौरान पूरा इलाका शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। डीजे पर बज रहे शिव भक्ति गीतों और जयकारों के बीच श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव, बोल बम और हर-हर भोला के जयकारों से माहौल गूंजता रहा।
यात्रा में शामिल 151 कन्याओं और महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से कलश लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने का संकल्प लिया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस धार्मिक आयोजन को देखने और यात्रा में शामिल होने के लिए सड़कों पर मौजूद रहे।
परमान नदी के तट से भरा पवित्र जल
इटहरा शिव मंदिर से शुरू हुई जलाभिषेक यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए त्रिसुलिया घाट स्थित परमान नदी के तट पर पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला।
परमान नदी के तट पर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने पहले स्नान और ध्यान किया। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार कलश में नदी का पवित्र जल भरा गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए जल को कलश में धारण किया और वापस इटहरा स्थित शिव मंदिर की ओर रवाना हुए।
वापसी के दौरान भी यात्रा में भक्ति का माहौल बना रहा। श्रद्धालु शिव भक्ति गीतों पर आगे बढ़ते रहे और लगातार भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते रहे। स्थानीय लोगों ने भी यात्रा का स्वागत किया और श्रद्धालुओं के उत्साह को बढ़ाया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ भगवान शिव का जलाभिषेक
जल लेकर श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने के बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का पवित्र जल से अभिषेक किया गया।
151 कन्याओं और महिलाओं ने विधि-विधान के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और परिवार के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच पूरे आयोजन को लेकर खास उत्साह रहा। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि सावन की अंतिम सोमवारी पर जलाभिषेक यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना है।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने लिया हिस्सा
इटहरा में आयोजित जलाभिषेक यात्रा में नगर परिषद के मुख्य पार्षद विजय कुमार मिश्रा, वार्ड संख्या-07 के पार्षद श्याम कुमार मंडल सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य लोग शामिल हुए।
इस दौरान उमेश मंडल, बबलू विश्वास, पिंटू कुमार, दुर्गानंद कुमार और सुनील मंडल समेत कई स्थानीय लोगों ने भी आयोजन में अपनी भागीदारी निभाई। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय लोगों और मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों ने सहयोग किया।
धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया। बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के कारण यात्रा के रास्तों पर भी काफी चहल-पहल देखने को मिली।
शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में भी उमड़ी भीड़
सिर्फ इटहरा शिव मंदिर ही नहीं, बल्कि अररिया शहर और आसपास के कई प्रमुख शिव मंदिरों में भी सावन की अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।
बाबा खरगेश्वर नाथ शिव मंदिर, बाबा अररिया नाथ शिव मंदिर, महादेव चौक स्थित शिव मंदिर, बाबा मदानेश्वर धाम और सुंदरनाथ धाम समेत अन्य शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी।
श्रद्धालुओं ने अलग-अलग मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। कई भक्तों ने व्रत रखा और पूरे दिन भगवान शिव की आराधना की। मंदिरों में बेलपत्र, फूल, दूध और जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं।

आकर्षक सजावट से जगमगाए शिवालय
सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसरों में रंग-बिरंगी रोशनी और धार्मिक सजावट देखने को मिली। कई जगहों पर भक्तों के लिए पूजा और जलाभिषेक की विशेष व्यवस्था की गई।
शिवालयों के आसपास भी सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां तेज रहीं। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। मंदिरों में शिव भक्ति से जुड़े गीत और मंत्रोच्चार सुनाई देते रहे।
पूरे दिन अररिया शहर में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा। सुबह से शुरू हुआ पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का सिलसिला देर तक जारी रहा।
आस्था और भक्ति से सराबोर रहा अररिया
सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर अररिया में आयोजित जलाभिषेक यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता की भी तस्वीर पेश की। 151 कन्याओं और महिलाओं की भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया।
परमान नदी से जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान शिव भक्ति गीत, जयकारे और श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी पूरे शहर के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
सावन के अंतिम सोमवार पर अररिया के शिवालयों में उमड़ी भीड़ ने यह दिखाया कि भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है। दिनभर मंदिरों में पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजते अररिया में सावन की अंतिम सोमवारी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई।










