उर्दू शिक्षक स्थानांतरण विवाद: बिहार में उर्दू शिक्षकों के स्थानांतरण और आगामी TRE-4 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और अमौर विधायक अख्तरुल ईमान ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अख्तरुल ईमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राज्य के कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां बड़ी संख्या में उर्दू भाषी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे स्कूलों से उर्दू शिक्षकों को सरप्लस शिक्षक बताकर स्थानांतरित करना शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हित में नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उर्दू शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जहां जरूरत है, वहां शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर जिन विद्यालयों में उर्दू पढ़ने वाले छात्रों की संख्या अधिक है, वहां से उर्दू शिक्षकों को हटाया जा रहा है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और भाषा शिक्षा की व्यवस्था कमजोर हो सकती है।

TRE-4 भर्ती में उर्दू और फारसी पदों को लेकर सवाल
AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने TRE-4 शिक्षक भर्ती में उर्दू, फारसी और अन्य भाषा विषयों के पद शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को इससे निराशा हुई है।
उन्होंने कहा कि भाषा विषयों के शिक्षकों की जरूरत सरकारी विद्यालयों में लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में इन विषयों के पदों को शामिल नहीं करना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि TRE-4 भर्ती प्रक्रिया में उर्दू, फारसी सहित अन्य भाषा विषयों के पदों को शामिल किया जाए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
अख्तरुल ईमान ने इस संबंध में शिक्षा मंत्री को पत्र भी लिखा है। उन्होंने मांग की है कि उर्दू शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया में सुधार किया जाए और नियमों के अनुसार ही फैसला लिया जाए। साथ ही TRE-4 भर्ती में भाषा शिक्षकों के पदों को शामिल करने की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएं।
सरकार से तत्काल निर्णय लेने की मांग
AIMIM नेता ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की नींव होती है। छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार विषय और भाषा के शिक्षक उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या अधिक है और वहां भाषा शिक्षक की आवश्यकता है, तो ऐसे स्थानों से शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

सरकार की नीतियों पर AIMIM विधायक सरवर आलम ने भी उठाए सवाल
वहीं, AIMIM के कोचाधामन विधायक सरवर आलम ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी विद्यालय में केवल एक उर्दू शिक्षक कार्यरत है और उसका भी तबादला कर दिया जाता है, तो वहां पढ़ने वाले छात्रों को उर्दू की शिक्षा कौन देगा।
सरवर आलम ने कहा कि भाषा शिक्षा को मजबूत करने के लिए सभी विषयों के शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में नियुक्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि उर्दू के साथ-साथ बंगाली, मैथिली, अरबी सहित अन्य भाषा विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने जानकारी दी कि अख्तरुल ईमान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेगा। इस दौरान शिक्षकों के स्थानांतरण और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
भाषा शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बढ़ी मांग
बिहार में भाषा शिक्षकों की नियुक्ति और तैनाती को लेकर समय-समय पर मांग उठती रही है। शिक्षाविदों और शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि छात्रों को अपनी भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है, जिससे उनकी समझ और सीखने की क्षमता बेहतर हो सके।
AIMIM नेताओं का कहना है कि उर्दू और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता से छात्रों को लाभ मिलेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि भर्ती प्रक्रिया में सभी भाषा विषयों को उचित स्थान दिया जाए।
आगे की रणनीति पर नजर
उर्दू शिक्षकों के स्थानांतरण और TRE-4 भर्ती में भाषा विषयों को शामिल करने की मांग को लेकर AIMIM ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे और छात्रों व अभ्यर्थियों के हितों के लिए आवाज बुलंद करेंगे।
अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या शिक्षक स्थानांतरण नीति व TRE-4 भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर बिहार की राजनीति और शिक्षा विभाग में बहस तेज हो गई है।










