कटिहार गंगा कटाव: बिहार के कटिहार जिले में गंगा नदी का बढ़ता कटाव एक बार फिर सैकड़ों परिवारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर रहा है। मनिहारी प्रखंड की धुरियाही पंचायत में गंगा की तेज धारा लगातार जमीन को काट रही है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि वार्ड संख्या 3, 4, 5 और 6 के करीब 200 परिवारों के घरों पर खतरा मंडरा रहा है। कई परिवार अपने घरों को छोड़ने की तैयारी में हैं, जबकि कुछ लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए अपने मकानों को खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले लगभग तीन वर्षों से गंगा का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हर साल बारिश और बाढ़ के मौसम में नदी का रुख बदलता है और उपजाऊ जमीन के साथ लोगों के सपनों को भी अपने साथ बहा ले जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक 100 से अधिक परिवार अपने घर गंवा चुके हैं। जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से मकान बनाए थे, वे देखते ही देखते गंगा की धारा में समा गए।
गंगा कटाव का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। ग्रामीणों का दावा है कि हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। यह वही जमीन थी, जिस पर खेती कर सैकड़ों परिवार अपना जीवनयापन करते थे। खेत खत्म होने के बाद लोगों के सामने रोजगार और आय का संकट भी गहरा गया है। जिन किसानों के पास कभी अच्छी खेती थी, आज वे अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए दूसरे इलाकों में मजदूरी करने को मजबूर हो रहे हैं।

कटाव प्रभावित ग्रामीण रवि पासवान बताते हैं कि उनके परिवार की जमीन और मकान दोनों गंगा में समा चुके हैं। अब उनके पास न खेती बची है और न ही रहने के लिए सुरक्षित घर। इसी तरह शकुंतला देवी कहती हैं कि हर दिन यह डर बना रहता है कि पता नहीं अगली सुबह उनका घर सुरक्षित रहेगा या नहीं। कन्हैया कुमार का कहना है कि प्रशासन की ओर से कुछ प्रयास जरूर किए गए हैं, लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।
गांव के लोगों का कहना है कि गंगा का कटाव सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। अब सरकारी संपत्तियां भी इसकी जद में आने लगी हैं। धुरियाही पंचायत का पंचायत सरकार भवन भी खतरे के दायरे में पहुंच चुका है। ग्रामीणों के अनुसार कटाव स्थल और भवन के बीच अब केवल 50 से 60 मीटर की दूरी बची है। यदि कटाव की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में यह भवन भी खतरे में पड़ सकता है।
कटाव रोकने के लिए प्रशासन की ओर से लगभग 250 मीटर क्षेत्र में कटावरोधी कार्य कराया गया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रयास पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि गंगा जैसी बड़ी नदी के सामने छोटे स्तर के अस्थायी उपाय ज्यादा दिन तक प्रभावी नहीं रह सकते। ग्रामीण सरकार से मजबूत और स्थायी तटबंध, बोल्डर पिचिंग तथा वैज्ञानिक तरीके से नदी तट संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा जैसी बड़ी नदियों में कटाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए जाएं तो यह हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। कटाव से न केवल आबादी का विस्थापन होता है, बल्कि कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ता है। कई बार लोगों को अपने गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर बसना पड़ता है, जिससे सामाजिक और आर्थिक समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा है कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार गंगा कटाव रोकने के लिए फ्लड फाइटिंग और कटावरोधी कार्य लगातार चल रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहले से उपलब्ध कराई गई है और जहां भी कटाव की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि कार्यपालक अभियंता और जूनियर इंजीनियर की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही है। उनका उद्देश्य समय रहते ऐसे कदम उठाना है, जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए जाएंगे।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल निगरानी और अस्थायी कार्यों से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका मानना है कि हर साल गंगा कटाव से होने वाले नुकसान को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए। यदि समय रहते मजबूत तटबंध और आधुनिक तकनीकों का उपयोग नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में और अधिक गांव इस समस्या की चपेट में आ सकते हैं।
गंगा किनारे रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता उनका भविष्य है। जिन परिवारों के घर और खेत कटाव की जद में हैं, उनके सामने रहने, रोजगार और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं एक साथ खड़ी हो गई हैं। लगातार बढ़ते कटाव ने लोगों के मन में भय का माहौल बना दिया है। हर बारिश और हर बाढ़ का मौसम उनके लिए नई चिंता लेकर आता है।

स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि कटाव प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए। जिन लोगों की जमीन और मकान नदी में समा चुके हैं, उन्हें उचित मुआवजा और वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही कटाव रोकने के लिए स्थायी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए, ताकि आने वाले समय में किसी और परिवार को अपना आशियाना न खोना पड़े।
कटिहार की धुरियाही पंचायत में गंगा कटाव की यह स्थिति केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह उन तमाम नदी किनारे बसे इलाकों की कहानी है, जहां हर साल लोग अपने घर, जमीन और आजीविका को बचाने की लड़ाई लड़ते हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो गंगा का यह कटाव आने वाले दिनों में और अधिक परिवारों को विस्थापन के लिए मजबूर कर सकता है।










