बेखौफ जुबां बे बाक अंदाज

कटिहार बाढ़ संकट: कटिहार में बाढ़ का दर्द: सावन आते ही नई बहुएं और गर्भवती महिलाएं क्यों चली जाती हैं मायके?

Share Now :

WhatsApp

कटिहार बाढ़ संकट: बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हर साल मानसून के दौरान यहां के लोगों की मजबूरी और संघर्ष को बयां करती है। सावन का महीना जहां कई परिवारों के लिए खुशियों और त्योहारों का समय होता है, वहीं कटिहार के कुछ गांवों में यह चिंता और परेशानी लेकर आता है। महानंदा नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी बढ़ते ही कई परिवार अपनी नई बहुओं और गर्भवती महिलाओं को मायके या सुरक्षित रिश्तेदारों के घर भेजने को मजबूर हो जाते हैं।

यह कोई सामान्य परंपरा नहीं, बल्कि हालात से पैदा हुई मजबूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दिनों में गांवों का संपर्क टूट जाता है और जरूरी सेवाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और नई बहुओं की सुरक्षा को देखते हुए परिवार पहले से ही उन्हें सुरक्षित जगह भेज देते हैं।

कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या गंभीर हो जाती है। महानंदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ आसपास के कई गांव पानी से घिर जाते हैं। कटिहार शहर से करीब 32 किलोमीटर दूर और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे कई गांव इस समस्या का सामना करते हैं।

कटिहार बाढ़ संकट
कटिहार बाढ़ संकट

इन गांवों में बस्ता, इंग्लिश, लालगंज समेत कई इलाके हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। बारिश बढ़ने के साथ ही नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ने लगता है। देखते ही देखते सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो जाता है।

बाढ़ आने के बाद सबसे बड़ी परेशानी आवागमन की होती है। कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोगों के पास आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र विकल्प रह जाती है। बाजार जाना, अस्पताल पहुंचना या जरूरी सामान लाना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसे हालात में गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए या किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या पैदा हो जाए तो अस्पताल पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। इसी चिंता के कारण परिवार पहले से ही गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेज देते हैं।

नई बहुओं को भी इसी वजह से मायके भेज दिया जाता है। परिवारों का मानना है कि बाढ़ के दौरान गांव में रहने की स्थिति बेहद कठिन हो जाती है। घरों में पानी घुसने, खाने-पीने की समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के बीच नई बहुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सावन शुरू होते ही कई परिवार उन्हें कुछ महीनों के लिए मायके भेज देते हैं।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि इसे केवल एक सामाजिक परंपरा के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह बाढ़ की वजह से पैदा हुई मजबूरी है। उनका कहना है कि हर साल मानसून आने के साथ परिवारों को अपने प्रियजनों से दूर रहने की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

कटिहार बाढ़ संकट
कटिहार बाढ़ संकट

कई परिवारों के लिए यह भावनात्मक रूप से भी कठिन समय होता है। एक तरफ बाढ़ का डर रहता है, तो दूसरी तरफ परिवार के सदस्यों से महीनों की दूरी भी सहनी पड़ती है। कई बार नई शादी के बाद ही महिलाओं को अपने ससुराल से दूर जाना पड़ता है, क्योंकि परिवार उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति वर्षों से चली आ रही है, लेकिन अब तक बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। उनका मानना है कि हर साल राहत कार्य करने के बजाय सरकार को ऐसी योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए, जिससे बाढ़ का प्रभाव कम किया जा सके।

स्थानीय लोगों की मांग है कि नदी कटाव रोकने, तटबंधों को मजबूत करने, जल निकासी व्यवस्था सुधारने और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि अगर गांवों में बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों तो लोगों को हर साल इस तरह के फैसले लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।

बाढ़ केवल घरों में पानी भरने की समस्या नहीं है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, रोजगार के साधन रुक जाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाती है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

कटिहार बाढ़ संकट
कटिहार बाढ़ संकट

कटिहार के इन गांवों की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा किस तरह लोगों की सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी को प्रभावित करती है। जहां दूसरे इलाकों में सावन त्योहार और खुशियों का महीना होता है, वहीं महानंदा किनारे बसे लोगों के लिए यह सतर्क रहने और मुश्किलों का सामना करने का समय बन जाता है।

ग्रामीणों की उम्मीद अब सरकार और प्रशासन से है कि बाढ़ नियंत्रण के लिए स्थायी कदम उठाए जाएं। वे चाहते हैं कि ऐसी व्यवस्था बने जिससे आने वाली पीढ़ियों को हर साल इसी परेशानी से न गुजरना पड़े।

फिलहाल कटिहार के इन गांवों में मानसून के साथ चिंता भी बढ़ जाती है। नई बहुओं और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि बाढ़ केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन से जुड़ी एक गंभीर चुनौती है।

 

8 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Other News

error: JEB News is copyright content