जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पूरे जिले में 1501 पुलिसकर्मियों के साथ 220 दंडाधिकारी और 300 से अधिक पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा जिले के 259 से अधिक महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर विशेष पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है। प्रशासन का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान आम लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिले और सभी समुदायों के लोग बिना किसी परेशानी के अपने पर्व मना सकें।
यह पूरी सुरक्षा व्यवस्था जिलाधिकारी नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के संयुक्त निर्देश पर तैयार की गई है। पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि जिले के सभी प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए जिले में सात सुपर जोनल गश्ती दलों का गठन किया गया है। इन टीमों की जिम्मेदारी अपने निर्धारित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय स्थिति की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई करना होगा।

इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला और अनुमंडल स्तर पर कुल 12 त्वरित प्रतिक्रिया दल यानी क्यूआरटी तैयार किए गए हैं। इनमें सात सामान्य क्यूआरटी और पांच बाइक क्यूआरटी शामिल हैं। इन सभी टीमों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है।
बाइक क्यूआरटी की तैनाती का उद्देश्य उन इलाकों तक भी तेजी से पहुंचना है, जहां बड़े पुलिस वाहनों को पहुंचने में परेशानी हो सकती है। किसी भी स्थान पर विवाद, भीड़ या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या सामने आने पर ये टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद करेंगी।
वहीं, त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही निरोधात्मक कार्रवाई भी की है। पुलिस के अनुसार, जिले में 5 हजार 671 उपद्रवियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 1 हजार 250 लोगों को बॉन्ड डाउन किया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य संभावित विवादों और अशांति की घटनाओं को पहले ही रोकना है।
प्रशासन ने केवल पुलिस बल की तैनाती तक ही अपनी तैयारी सीमित नहीं रखी है, बल्कि स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया है। जिले के सभी थाना क्षेत्रों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से बातचीत कर त्योहार को आपसी भाईचारे के साथ मनाने की अपील की गई है।
शांति समिति की बैठकों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया है कि दीपावली और काली पूजा जैसे पर्व समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करने का अवसर हैं। इसलिए किसी भी तरह की अफवाह, विवाद या भड़काऊ गतिविधि से बचना जरूरी है।

इधर, संवेदनशील इलाकों में पुलिस द्वारा एरिया डोमिनेशन और फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है। पुलिस की टीमें लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर रही हैं, ताकि असामाजिक तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
त्योहार के दौरान थाना गश्ती के साथ-साथ बाइक पेट्रोलिंग भी लगातार जारी रहेगी। बाजारों, पूजा स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रमुख सड़कों पर पुलिस की विशेष निगरानी रहेगी। खास तौर पर उन स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जहां दीपावली और काली पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
काली पूजा के पंडालों और विसर्जन जुलूसों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन ने वीडियोग्राफी और ड्रोन कैमरों के माध्यम से महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर रखने की व्यवस्था की है। इससे भीड़ की गतिविधियों पर निगरानी रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति का समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा जिला और अनुमंडल स्तर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं। इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। जिला नियंत्रण कक्ष में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के जरिए महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों की निगरानी की जाएगी।
सीसीटीवी कैमरों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जरूरत पड़ने पर पुलिस टीमों को तत्काल संबंधित स्थान पर भेजा जा सकेगा। इससे किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
प्रशासन ने पूजा समितियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने का निर्देश दिया है। सभी पूजा समितियों से कहा गया है कि वे अपने पंडालों में पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की व्यवस्था करें। साथ ही सभी स्वयंसेवकों को पहचान पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ड्यूटी के दौरान उनकी पहचान आसानी से हो सके।
पूजा समितियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहार के दौरान केवल पुलिस की तैनाती पर्याप्त नहीं होती, बल्कि स्थानीय लोगों और आयोजन समितियों का सहयोग भी बेहद जरूरी होता है।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि दीपावली और काली पूजा के दौरान आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत पुलिस या प्रशासन को सूचना दें।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, किशनगंज में दीपावली और काली पूजा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा का व्यापक खाका तैयार किया है। 1501 पुलिसकर्मियों, 220 दंडाधिकारियों, 300 से अधिक पुलिस अधिकारियों, सात सुपर जोनल गश्ती दलों और 12 क्यूआरटी की तैनाती के साथ आधुनिक निगरानी तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
अब प्रशासन की कोशिश है कि जिले में दोनों त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों और लोग बिना किसी डर या परेशानी के अपने परिवार और समुदाय के साथ खुशियां मना सकें। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि त्योहार की असली खुशी आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द में ही है।
फिलहाल किशनगंज में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और त्योहार के दौरान लगातार निगरानी जारी रहेगी।










