इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। एक ही परिवार की तीन बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में जहां कुछ समय पहले तक बच्चों की हंसी-खुशी सुनाई देती थी, वहां अब चीख-पुकार और मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव के लोग भी इस हादसे से गहरे सदमे में हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड अंतर्गत हरूवाडांगा के सुल्तानगंज वार्ड नंबर 10 में बुधवार को हुआ। बताया जा रहा है कि तीनों बच्चियां अपने घर में मिट्टी का लेप लगाने के लिए पास के एक स्थान पर मिट्टी खोदने गई थीं। ग्रामीण इलाकों में कई घरों की दीवारों और फर्श पर मिट्टी का लेप लगाने की परंपरा आज भी प्रचलित है। इसी काम के लिए बच्चियां मिट्टी इकट्ठा करने पहुंची थीं।
तीनों बच्चियां टोकरी में मिट्टी भरकर अपने घर ले जा रही थीं। इसी दौरान अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर पड़ा। देखते ही देखते तीनों बच्चियां मिट्टी के भारी मलबे के नीचे दब गईं। हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें वहां से हटने या अपनी जान बचाने का मौका तक नहीं मिल सका।

मिट्टी का टीला धंसते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और तुरंत बच्चियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मिट्टी हटाकर बच्चियों तक पहुंचने का प्रयास किया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और हर कोई बच्चियों को बचाने की उम्मीद में मदद करने लगा।
लेकिन यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। जब तक बच्चियों को मिट्टी के नीचे से बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। तीन मासूम जिंदगियों के इस तरह अचानक खत्म हो जाने से मौके पर मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गए। जिस जगह कुछ देर पहले बच्चियां मिट्टी इकट्ठा कर रही थीं, वहां देखते ही देखते मातम छा गया।
इस हादसे में जान गंवाने वाली बच्चियों की पहचान जमदेश आलम की बेटियों 10 वर्षीय नगमा प्रवीण और 9 वर्षीय निशा प्रवीण के रूप में हुई है। वहीं तीसरी बच्ची 8 वर्षीय रूबी खातून थी, जो जमदेश आलम के सगे भाई फरियाद आलम की बेटी थी। इस तरह हादसे में जान गंवाने वाली तीनों बच्चियां एक ही परिवार की थीं।
एक ही परिवार की तीन बेटियों की मौत ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया है। जिन माता-पिता और परिवार के सदस्यों ने बच्चियों को अपने सामने खेलते-कूदते और बड़े होते देखा था, उन्हें एक साथ तीन मासूमों की मौत का सामना करना पड़ा। परिवार के लिए यह दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटानी शुरू की। पुलिस ने परिजनों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की, ताकि यह समझा जा सके कि बच्चियां किस स्थान पर मिट्टी खोद रही थीं और किस परिस्थिति में मिट्टी का टीला अचानक धंस गया।

दिघलबैंक थानाध्यक्ष विपिन कुमार के मुताबिक, परिजनों ने बच्चियों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया है। पुलिस इस संबंध में परिवार के सदस्यों से बातचीत कर रही है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर आगे की प्रक्रिया को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में मिट्टी खोदने और मिट्टी के अस्थिर टीलों के पास काम करने के दौरान होने वाले खतरों की ओर भी ध्यान खींचा है। कई बार मिट्टी के ऊपरी हिस्से को मजबूत दिखाई देने के बावजूद अंदर से जमीन कमजोर हो सकती है। खासकर जहां पहले से मिट्टी की खुदाई की गई हो, वहां अचानक मिट्टी खिसकने या पूरा हिस्सा धंसने का खतरा बना रहता है।
ऐसी जगहों पर बच्चों का जाना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है। मिट्टी के टीले या गड्ढे के आसपास की जमीन कब कमजोर होकर गिर जाए, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता। इसलिए मिट्टी निकालने के लिए सुरक्षित स्थान का चयन करना और गहरी या अस्थिर खुदाई से बचना बेहद जरूरी है। बच्चों को भी ऐसे स्थानों से दूर रखने की जरूरत है, जहां मिट्टी धंसने की आशंका हो।

हालांकि, किशनगंज में हुए इस हादसे के पीछे की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से घटनास्थल की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस हादसे के बाद सुल्तानगंज वार्ड नंबर 10 और आसपास के गांवों में मातम पसरा हुआ है। परिवार के लोग अपनी बच्चियों को याद कर लगातार रो रहे हैं। गांव के लोग भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर कुछ पल पहले मिट्टी लेने निकली तीन मासूम बच्चियों की जिंदगी इस तरह कैसे खत्म हो गई।
किशनगंज की यह घटना एक परिवार के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गई है। नगमा प्रवीण, निशा प्रवीण और रूबी खातून अब इस दुनिया में नहीं हैं। तीनों की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। फिलहाल परिवार की पीड़ा और गांव में पसरे मातम के बीच सभी की नजरें प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।










