किशनगंज सीमा सुरक्षा: नेपाल में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध गढ़ीमाई मेले को देखते हुए बिहार के किशनगंज जिले में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। मेले के दौरान पशुओं की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर अवैध पशु परिवहन और तस्करी की आशंका जताई जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
किशनगंज जिला प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोकने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी नवीन कुमार ने सीमा क्षेत्र में तैनात अधिकारियों और सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि भारत-नेपाल सीमा का इस्तेमाल किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि के लिए न हो।
गढ़ीमाई मेले के दौरान नेपाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान मवेशियों की मांग भी बढ़ जाती है। प्रशासन को आशंका है कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर भारत से नेपाल की ओर पशुओं की अवैध आवाजाही की कोशिश कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन के निर्देश के बाद किशनगंज जिले के सीमावर्ती इलाकों जैसे गलगलिया, ठाकुरगंज और पौआखाली क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ गई है। इन इलाकों में नियमित गश्त की जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

सीमा सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी की विभिन्न बटालियनों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है। इनमें 13वीं बटालियन एसएसबी किशनगंज, 19वीं बटालियन एसएसबी ठाकुरगंज और 41वीं बटालियन एसएसबी रानीगंज शामिल हैं। इन सभी इकाइयों को सीमा क्षेत्रों में निगरानी और जांच अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने नेपाल जाने वाले सभी प्रमुख रास्तों के साथ-साथ छोटे मार्गों और पगडंडियों पर भी नजर रखने को कहा है। कई बार तस्कर मुख्य रास्तों से बचने के लिए ग्रामीण रास्तों और कम निगरानी वाले क्षेत्रों का इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी की जा रही है।
इसके अलावा सीमा क्षेत्र से गुजरने वाले मालवाहक वाहनों और संदिग्ध गाड़ियों की जांच भी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना उचित दस्तावेजों के किसी भी पशु परिवहन को अनुमति न दी जाए। जांच के दौरान संदिग्ध पाए जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने अनुमंडल पदाधिकारी ठाकुरगंज, पुलिस अधीक्षक किशनगंज और जिला पशुपालन पदाधिकारी को आपसी तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का कहना है कि पुलिस, एसएसबी और संबंधित विभाग मिलकर संयुक्त अभियान चलाएंगे ताकि सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, पशु तस्करी रोकने के लिए केवल सीमा पर निगरानी ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें पशुओं की अवैध खरीद-बिक्री या संदिग्ध परिवहन की जानकारी मिलती है तो वे तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। लोगों के सहयोग से ही सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पशु तस्करी या किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। यदि कोई व्यक्ति तस्करी में संलिप्त पाया जाता है या तस्करों की मदद करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
किशनगंज प्रशासन का यह कदम गढ़ीमाई मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भारत-नेपाल सीमा को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में निगरानी और जांच अभियान को और तेज किया जा सकता है।
फिलहाल सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रशासन पूरी तैयारी के साथ किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय नजर आ रहा है।









