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किशनगंज स्मैक बरामदगी: किशनगंज में एक करोड़ की स्मैक के साथ आरोपी गिरफ्तार, 86 हजार रुपये कैश, 3 मोबाइल और डिजिटल तराजू जब्त

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किशनगंज स्मैक बरामदगी: बिहार के किशनगंज जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 434.10 ग्राम स्मैक जैसा नशीला पदार्थ बरामद किए जाने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, बरामद पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई में लगभग 86 हजार रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और दो डिजिटल वजन मशीनें भी जब्त की गई हैं।

पुलिस अब इस मामले की जांच करते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर बरामद नशीला पदार्थ कहां से लाया गया था, इसकी आपूर्ति किन लोगों को की जानी थी और इस मामले में कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

आखिर किशनगंज में यह कार्रवाई कैसे हुई? पुलिस को आरोपी के बारे में सूचना कैसे मिली? छापेमारी के दौरान कौन-कौन सी चीजें बरामद की गईं? और अब जांच की दिशा क्या है? आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

दरअसल, किशनगंज पुलिस की यह कार्रवाई जिले में मादक पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के निर्देशन में मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस को एक व्यक्ति के कथित तौर पर नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री में शामिल होने की गुप्त सूचना मिली।

पुलिस के अनुसार, सूचना में बताया गया था कि उमर फारूक नाम का व्यक्ति किशनगंज थाना क्षेत्र के खगड़ा पासवान टोला में स्थित अपने मकान में नशीला पदार्थ रखता है और उसकी खरीद-बिक्री करता है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पहले उसका सत्यापन किया। इसके बाद छापेमारी की योजना बनाई गई।

किशनगंज स्मैक बरामदगी
किशनगंज स्मैक बरामदगी

कार्रवाई के लिए एएनटीएफ यानी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, जिला आसूचना इकाई और विशेष कार्य बल की संयुक्त टीम गठित की गई। इस टीम का नेतृत्व एसडीपीओ-1 खुसरू सिराज ने किया। इसके बाद पुलिस टीम ने किशनगंज थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 32 स्थित एक मकान पर छापेमारी की।

पुलिस के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मकान से 31 वर्षीय उमर फारूक को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से 434.10 ग्राम स्मैक जैसा पदार्थ बरामद हुआ। पुलिस ने इसकी अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई है।

हालांकि, बरामद पदार्थ की वास्तविक प्रकृति और अन्य संबंधित तथ्यों की पुष्टि जांच तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत की जानी है। फिलहाल पुलिस इसे स्मैक जैसा नशीला पदार्थ बता रही है।

छापेमारी के दौरान पुलिस को केवल नशीला पदार्थ ही नहीं मिला, बल्कि नकदी और कई अन्य सामान भी बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से 85 हजार 990 रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और दो डिजिटल वजन मशीनें जब्त की गई हैं।

जांच एजेंसियां इन बरामद वस्तुओं को कथित मादक पदार्थ कारोबार से जोड़कर देख रही हैं। डिजिटल वजन मशीनों के इस्तेमाल, नकदी के स्रोत और मोबाइल फोन में मौजूद जानकारी की जांच की जा रही है। हालांकि, इन वस्तुओं की बरामदगी अपने आप में किसी विशेष अपराध में उनकी भूमिका को अंतिम रूप से साबित नहीं करती। पुलिस की जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने बताया कि उमर फारूक फिलहाल किशनगंज के खगड़ा इलाके में किराए के मकान में रह रहा था। उसका स्थायी पता पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुशमंडी थाना क्षेत्र में बताया गया है। इस जानकारी के आधार पर जांच का दायरा किशनगंज से आगे भी बढ़ सकता है।

किशनगंज स्मैक बरामदगी
किशनगंज स्मैक बरामदगी

पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री में शामिल होने की बात स्वीकार की है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। किसी भी आरोपी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए गए सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होता है।

इस मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर बरामद नशीला पदार्थ किस स्रोत से आया था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इसकी आपूर्ति किन लोगों तक की जानी थी और क्या आरोपी के संपर्क में दूसरे लोग भी थे।

पुलिस ने जब्त किए गए तीनों मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया है। मोबाइल फोन में मौजूद कॉल डिटेल, संपर्कों और अन्य प्रासंगिक डिजिटल जानकारी की जांच से कथित आपूर्ति श्रृंखला के बारे में सुराग मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि नशीले पदार्थ की खरीद-बिक्री के लिए किन लोगों से संपर्क किया जाता था और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

इस मामले में किशनगंज थाना में कांड संख्या 1133/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट यानी एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 8(c) और 21(c) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(c) प्रतिबंधित मादक और मन:प्रभावी पदार्थों से संबंधित निषिद्ध गतिविधियों पर रोक लगाती है, जबकि धारा 21 कुछ निर्दिष्ट मादक पदार्थों से जुड़े उल्लंघनों और दंड से संबंधित है। इस मामले में लागू प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

पुलिस के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बरामद पदार्थ की आपूर्ति कहां से हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता के साक्ष्य मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

किशनगंज स्मैक बरामदगी
किशनगंज स्मैक बरामदगी

किशनगंज में की गई इस कार्रवाई को जिले में मादक पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री पर अंकुश लगाने के अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाएगी और तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास जारी रहेगा।

हालांकि, किसी भी कार्रवाई की सफलता केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं होती। जांच के जरिए आपूर्ति के स्रोत, वितरण के तरीकों और संभावित सहयोगियों तक पहुंचना भी महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में मोबाइल फोन के तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों की जांच से आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

फिलहाल, किशनगंज पुलिस ने उमर फारूक को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से 434.10 ग्राम स्मैक जैसा पदार्थ, 85 हजार 990 रुपये नकद, तीन मोबाइल फोन और दो डिजिटल वजन मशीनें जब्त करने की जानकारी दी है। बरामद पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है।

अब देखना होगा कि आगे की जांच में कथित तस्करी नेटवर्क को लेकर क्या जानकारी सामने आती है और पुलिस इस मामले में अन्य लोगों तक पहुंच पाती है या नहीं।

किशनगंज से जुड़ी इस खबर पर हमारी नजर बनी रहेगी। मामले में जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों को भी आप तक पहुंचाया जाएगा।

 

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