गोविंदपुर जन्माष्टमी मेला: कटिहार के कोढ़ा प्रखंड के गोविंदपुर गांव में जन्माष्टमी के मौके पर भव्य चार दिवसीय मेले का आयोजन शुरू हो गया है। करीब 80 साल पुराने राधे-कृष्ण मंदिर परिसर में लगने वाले इस मेले को लेकर पूरे इलाके में उत्सव और भक्ति का माहौल बना हुआ है। 4 सितंबर से शुरू हुआ यह मेला 7 सितंबर तक चलेगा। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होने वाले इस मेले में स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के जिलों, पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे हैं।
गोविंदपुर गांव का यह जन्माष्टमी मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा माना जाता है। आयोजन समिति के मुताबिक, पिछले करीब 80 वर्षों से यहां भगवान राधे-कृष्ण की पूजा और जन्माष्टमी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता रहा है। हर साल की तरह इस बार भी मेले को खास अंदाज में सजाया गया है। इस बार करीब 5 बीघा जमीन में मेले का विस्तार किया गया है, जहां अलग-अलग तरह की दुकानें, मनोरंजन के साधन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भव्य पंडाल तैयार किए गए हैं।
मेले की शुरुआत होते ही बड़ी संख्या में लोग आयोजन स्थल पर पहुंचने लगे। पहले दिन नवयुवक संघ की ओर से भक्ति जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार के अलावा नेपाल और पश्चिम बंगाल से पहुंचे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों ने गीत-संगीत, भाव नृत्य और धार्मिक झांकियों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान पंडाल में श्रद्धालुओं और दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिली। खास बात यह रही कि तेज बारिश के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में लोग पंडाल में मौजूद रहे और देर रात तक भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। धार्मिक माहौल के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियों ने लोगों को खूब आकर्षित किया।
मेले का औपचारिक उद्घाटन कोढ़ा विधायक कविता पासवान और मेला कमेटी के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के दौरान भगवान राधे-कृष्ण की पूजा-अर्चना की गई और मेले के सफल आयोजन की कामना की गई। इस दौरान आयोजन समिति से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
आयोजन समिति के अनुसार, इस बार मेले को पिछले वर्षों की तुलना में और ज्यादा भव्य रूप दिया गया है। करीब 5 बीघा जमीन में फैले मेले में 100 से अधिक दुकानें लगाई गई हैं। इन दुकानों पर खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ घरेलू जरूरत का सामान, खिलौने, सजावटी सामान और अन्य वस्तुएं उपलब्ध हैं। मेले में आने वाले लोगों के लिए खरीदारी के साथ मनोरंजन का भी खास इंतजाम किया गया है।
बच्चों और युवाओं को आकर्षित करने के लिए मेले में कई बड़े झूले और मनोरंजन के साधन लगाए गए हैं। इनमें टावर झूला, ड्रैगन ट्रेन और मौत का कुआं खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शाम होते ही इन मनोरंजन के साधनों के आसपास लोगों की भीड़ बढ़ने लगती है। बच्चे अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचकर झूलों और दूसरी गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं।
मेले में सिर्फ बच्चों और युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं। लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद मेले में घूम रहे हैं, खरीदारी कर रहे हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठा रहे हैं। जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव के साथ मेले की चहल-पहल ने पूरे गोविंदपुर गांव को उत्सव के रंग में रंग दिया है।

इस आयोजन की खासियत यह भी है कि इसमें सिर्फ कटिहार जिले के लोग ही शामिल नहीं होते। कटिहार के अलग-अलग इलाकों के अलावा पूर्णिया और अररिया जिले से भी लोग मेले में पहुंच रहे हैं। वहीं पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी श्रद्धालुओं और दर्शकों के आने का सिलसिला जारी है। नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक इस मेले में पहुंच रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों के आने के कारण मेले में विभिन्न इलाकों की संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिल रही है।
80 साल पुराने इस आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मेला उनके लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि पुरानी परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ आयोजन है। कई परिवार ऐसे हैं जो वर्षों से इस मेले में शामिल होते आ रहे हैं। नई पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही है और जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर और मेले में पहुंच रही है।
मेले में आने वाली बड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मेला परिसर पर नजर रखने के लिए 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा निगरानी के लिए दो ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मेले में आने-जाने वाले लोगों और भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं और दर्शकों की सुविधा के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने या चोट लगने की स्थिति में प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मेला परिसर में भीड़ को व्यवस्थित रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयोजकों तथा पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर राधे-कृष्ण की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। जैसे-जैसे जन्माष्टमी का मुख्य पर्व नजदीक आ रहा है, मेले में लोगों की भीड़ और बढ़ने की उम्मीद है।

गोविंदपुर का यह मेला धार्मिक आस्था, मनोरंजन और सांस्कृतिक परंपरा का अनोखा संगम बन गया है। एक तरफ 80 साल पुराने राधे-कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिल रही है, तो दूसरी तरफ विशाल मेले में झूले, दुकानें और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, कटिहार के कोढ़ा प्रखंड का गोविंदपुर गांव इन दिनों जन्माष्टमी के रंग में रंगा हुआ है। 5 बीघा में फैले भव्य मेले में 100 से ज्यादा दुकानें, बड़े झूले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। बिहार के अलग-अलग जिलों के साथ पश्चिम बंगाल और नेपाल से भी लोगों की मौजूदगी इस मेले की लोकप्रियता को दर्शा रही है। चार दिनों तक चलने वाला यह आयोजन न सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को उत्साह के साथ मनाएगा, बल्कि 80 साल पुरानी इस धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भी आगे बढ़ाएगा।










