पूर्णिया पुल हादसा: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। परमान नदी पर बना सालों पुराना लोहे का पुल अचानक भरभराकर टूट गया। इसी दौरान पुल से गुजर रहा बालू से लदा एक ओवरलोड ट्रक भी पुल के साथ नदी में जा गिरा। पुल टूटने का अंदाजा होते ही ट्रक चालक ने अपनी जान बचाने के लिए समय रहते छलांग लगा दी। इस वजह से उसकी जान बच गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
यह हादसा अमौर प्रखंड की तियरपाड़ा पंचायत स्थित असियानी घाट पर हुआ। बताया जा रहा है कि परमान नदी पर बना यह लोहे का पुल काफी पुराना और जर्जर हालत में था। लंबे समय से इसकी स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से चिंता जताई जा रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की हालत ऐसी हो चुकी थी कि उस पर भारी वाहनों की आवाजाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।

रविवार सुबह जब बालू लदा ट्रक पुल से गुजर रहा था, उसी दौरान अचानक पुल का एक हिस्सा टूटने लगा। देखते ही देखते लोहे का पुल ध्वस्त हो गया और ट्रक भी नदी में जा गिरा। पुल टूटने का आभास होते ही ट्रक चालक ने किसी तरह छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। हादसे में चालक के सुरक्षित बच जाने से लोगों ने राहत की सांस ली।
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर सामने आई कि पुल के टूट जाने से अमौर और जलालगढ़ के बीच सीधा संपर्क बाधित हो गया है। इस पुल का इस्तेमाल आसपास के ग्रामीण और वाहन चालक लंबे समय से आवागमन के लिए करते आ रहे थे। पुल के अचानक टूट जाने के कारण स्थानीय लोगों के सामने आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।
पुल टूटने की खबर इलाके में तेजी से फैली। इसके बाद आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों ने नदी में गिरे ट्रक को देखा और हादसे की जानकारी अधिकारियों को दी। मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रशासन की ओर से स्थिति को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों ने घटनास्थल पर तकनीकी टीम भेजकर पुल टूटने के कारणों की जांच शुरू करने की बात कही है। तकनीकी टीम पुल की संरचना, उसकी स्थिति और हादसे के संभावित कारणों की जांच करेगी। इसके अलावा नदी में गिरे ट्रक और क्षतिग्रस्त पुल के आसपास की स्थिति का भी जायजा लिया जा रहा है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर SDRF को भी अलर्ट कर दिया है। नदी में ट्रक गिरने के बाद किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक ट्रक चालक समय रहते छलांग लगाकर सुरक्षित निकल गया।

हादसे के बाद ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। पुल की मरम्मत कराने और लोगों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने की मांग पहले भी उठाई जाती रही थी। लोगों का आरोप है कि जर्जर पुल की स्थिति के बावजूद इस पर वाहनों की आवाजाही जारी रही।
ग्रामीणों की नाराजगी की एक बड़ी वजह पास में बन रहा नया पक्का पुल भी है। ग्रामीणों के मुताबिक, पुराने पुल के पास करीब ढाई साल पहले नए पक्के पुल का निर्माण शुरू किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि नया पुल बनने के बाद पुराने जर्जर पुल से छुटकारा मिल जाएगा और अमौर तथा आसपास के इलाकों के लोगों को सुरक्षित और बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि करीब ढाई साल बीतने के बावजूद नए पुल का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि नए पुल के निर्माण में अभी तक सिर्फ दो पिलर ही तैयार हो पाए हैं। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नए पक्के पुल का निर्माण समय पर पूरा हो गया होता, तो पुराने और जर्जर लोहे के पुल पर लोगों की निर्भरता खत्म हो जाती। ऐसे में रविवार को हुआ यह हादसा शायद टाला जा सकता था। ग्रामीण अब प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग कर रहे हैं कि नए पुल का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को आवागमन के लिए सुरक्षित रास्ता मिल सके।
इस हादसे ने इलाके में पुराने और जर्जर पुलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे पुल, जिनसे रोजाना भारी वाहनों की आवाजाही होती है, उनकी नियमित जांच और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी मानी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से जर्जर पुलों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
बालू से लदे ओवरलोड ट्रक के नदी में गिरने की घटना ने भारी वाहनों की आवाजाही और ओवरलोडिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल विभाग की टीम पुल टूटने के कारणों की जांच कर रही है।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमौर और जलालगढ़ के बीच आवागमन को सामान्य करना है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे आसपास के गांवों के लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है और रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करे और नए पक्के पुल के निर्माण में तेजी लाए। साथ ही पुराने पुल के पूरी तरह क्षतिग्रस्त हिस्से को देखते हुए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई दूसरा वाहन या व्यक्ति दुर्घटना का शिकार न हो।
फिलहाल घटनास्थल पर प्रशासन और संबंधित विभाग की नजर बनी हुई है। तकनीकी टीम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुल किस वजह से अचानक ध्वस्त हुआ। वहीं, नदी में गिरे ट्रक को निकालने की कार्रवाई और क्षतिग्रस्त पुल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं।
पूर्णिया के अमौर में हुआ यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जर्जर हो चुके पुलों को लेकर समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जाते। गनीमत रही कि ट्रक चालक ने समय रहते छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली और हादसा किसी बड़े जानमाल के नुकसान में नहीं बदला। लेकिन पुल के टूटने से अमौर और जलालगढ़ के बीच संपर्क बाधित होना स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और नए पुल के निर्माण पर है। लोगों को उम्मीद है कि इस हादसे के बाद विभाग जर्जर पुलों की स्थिति की गंभीरता से जांच करेगा और नए पुल का निर्माण जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके।










