दीपावली के बाद अब छठ महापर्व और सर्दियों की छुट्टियों को देखते हुए बिहार लौटने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में प्रवासी बिहारी अपने परिवार के साथ छठ मनाने के लिए घर पहुंचना चाहते हैं। बिहार के सीमांचल क्षेत्र में छठ पर्व का विशेष महत्व है। किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, कटिहार और आसपास के जिलों में रहने वाले लोग देश के अलग-अलग राज्यों में नौकरी, व्यवसाय और पढ़ाई करते हैं। त्योहार के मौके पर ये लोग अपने गांव और परिवार के पास लौटने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस बार रेलवे टिकटों की उपलब्धता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

सबसे ज्यादा परेशानी दिल्ली से किशनगंज आने वाले यात्रियों को हो रही है। जानकारी के मुताबिक, अगले एक सप्ताह तक ज्यादातर नियमित ट्रेनों में कन्फर्म सीट उपलब्ध नहीं है। कई ट्रेनों में स्लीपर और थर्ड एसी श्रेणी की वेटिंग लिस्ट 250 से 300 के पार पहुंच गई है। कुछ ट्रेनों में स्थिति नो रूम तक पहुंच चुकी है। यानी यात्रियों को टिकट बुक कराने के बावजूद यात्रा की पुष्टि नहीं मिल पा रही है।
दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी घर जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। टिकट काउंटरों से लेकर आरक्षण केंद्रों तक लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं। कई यात्री ऑनलाइन टिकट बुकिंग के जरिए भी लगातार सीटों की उपलब्धता जांच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
किशनगंज के निवासी श्याम गुप्ता, राजीव मिश्रा और अरविंद ने फोन पर बताया कि वे दिल्ली से अपने घर लौटने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने कई ट्रेनों में टिकट लेने की कोशिश की, लेकिन किसी में भी कन्फर्म सीट नहीं मिल सकी। यात्रियों के मुताबिक, सामान्य ट्रेनों में पहले से ही भारी वेटिंग चल रही है और स्पेशल ट्रेनों में भी सीटें लगभग भर चुकी हैं। ऐसे में उनके सामने घर पहुंचने का रास्ता मुश्किल होता जा रहा है।
यात्रियों का कहना है कि छठ पर्व साल में एक बार आता है और इस अवसर पर परिवार के साथ रहना हर किसी की इच्छा होती है। कई लोग पूरे साल काम करने के बाद इसी त्योहार पर छुट्टी लेकर घर आते हैं। कुछ लोगों के लिए छठ केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परिवार और अपनी जड़ों से जुड़ने का खास अवसर भी है। ऐसे में टिकट नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

अगर प्रमुख ट्रेनों की बात करें तो दिल्ली से किशनगंज और सीमांचल क्षेत्र की ओर आने वाली संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस और अवध-असम एक्सप्रेस में यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन ट्रेनों के स्लीपर और थर्ड एसी कोच में वेटिंग 250 के पार पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कई तारीखों पर स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर बताई जा रही है।
वहीं, राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन में भी यात्रियों को आसानी से कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है। इसमें भी कई यात्रियों को आरएसी या लंबी वेटिंग लिस्ट के साथ टिकट मिल रहा है। इससे साफ है कि त्योहार के दौरान बिहार आने वाली ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ गया है।
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से किशनगंज आने वाले यात्रियों को भी इसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इन शहरों में बड़ी संख्या में बिहार के लोग काम करते हैं। दीपावली के बाद छठ के लिए घर लौटने वालों की संख्या बढ़ने से लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटों की मांग काफी ज्यादा हो गई है। कई यात्री महीनों पहले से टिकट बुक कराने की कोशिश करते हैं, लेकिन त्योहार के समय अचानक बढ़ने वाली मांग के कारण उन्हें भी कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता।
रेलवे की ओर से यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। लेकिन यात्रियों का कहना है कि इन ट्रेनों में भी सीटें उपलब्ध नहीं हैं। कई स्पेशल ट्रेनों में बुकिंग शुरू होते ही सीटें भर जा रही हैं। ऐसे में जिन यात्रियों को नियमित ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही, उनके लिए स्पेशल ट्रेनें भी राहत का पर्याप्त विकल्प साबित नहीं हो रही हैं।
अब बहुत से यात्रियों की उम्मीद तत्काल टिकट पर टिकी हुई है। यात्री यात्रा से एक दिन पहले तत्काल कोटे में टिकट बुक कराने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि तत्काल टिकट मिलना भी आसान नहीं है। सीमित सीटों और बड़ी संख्या में एक साथ बुकिंग की कोशिश के कारण कुछ ही समय में सीटें खत्म हो जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को आखिरी समय तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

त्योहार के दौरान रेलवे स्टेशनों पर भीड़ बढ़ने से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों में अतिरिक्त भीड़ होने पर प्लेटफॉर्म पर इंतजार करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती है। परिवार के साथ यात्रा करने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। कई यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ती है, जबकि कुछ लोग मजबूरी में बस या अन्य परिवहन साधनों का विकल्प तलाशते हैं।
रेलवे के सामने भी इस समय बड़ी चुनौती है। एक तरफ नियमित ट्रेनों में पहले से यात्रियों का दबाव है, तो दूसरी तरफ छठ और सर्दियों की छुट्टियों के कारण अतिरिक्त मांग बढ़ गई है। ऐसे में यात्रियों को राहत देने के लिए स्पेशल ट्रेनों की संख्या, उनके फेरे और अतिरिक्त कोचों की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर दिल्ली और बिहार के बीच चलने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने की मांग उठ सकती है।
यात्रियों की अपेक्षा है कि रेलवे किशनगंज और सीमांचल क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त ट्रेनें चलाए। इसके अलावा जिन नियमित ट्रेनों में यात्रियों का दबाव सबसे ज्यादा है, उनमें अतिरिक्त स्लीपर और एसी कोच लगाए जाएं। इससे छठ पर्व पर घर लौटने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, यात्रियों को टिकट बुक करते समय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर सीटों की उपलब्धता और टिकट की वर्तमान स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। वेटिंग टिकट और आरएसी टिकट के नियमों को समझना भी जरूरी है। खासकर ई-टिकट के मामले में चार्ट बनने के बाद टिकट की स्थिति के अनुसार यात्रा की अनुमति के नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
फिलहाल छठ महापर्व से पहले किशनगंज आने वाले यात्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घर पहुंचने की है। दिल्ली से लेकर मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद तक रहने वाले प्रवासी बिहारी कन्फर्म टिकट की तलाश में परेशान हैं। नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग और स्पेशल ट्रेनों के फुल होने से उनकी चिंता बढ़ गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेलवे छठ महापर्व से पहले अतिरिक्त ट्रेनों और कोचों की व्यवस्था कर पाएगा? क्या हजारों प्रवासी बिहारी समय पर अपने घर पहुंचकर परिवार के साथ छठ मना सकेंगे? फिलहाल यात्रियों की निगाहें रेलवे की ओर से मिलने वाली राहत पर टिकी हुई हैं।










