विपक्षी हमला: बिहार के भागलपुर में एनडीए की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष के चुनावी रवैये, लोकतंत्र को लेकर दिए जा रहे बयानों और एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाए। नितिन नवीन ने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक स्थिति और रणनीति पर समय रहते विचार करना चाहिए, वरना आने वाले दिनों में उसके लिए अपनी कुर्सी बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
भागलपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में एनडीए के नेताओं और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना बताया गया। इसी दौरान बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष के आरोपों पर अपनी बात रखी और कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर लोकतंत्र को लेकर अलग-अलग बयान देना उचित नहीं है।
जनसभा को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा कि जब विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं, तब वे इसे लोकतंत्र की जीत बताते हैं। लेकिन जब चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, तो लोकतंत्र पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव के नतीजों को स्वीकार करना जरूरी है। जीत मिलने पर चुनावी प्रक्रिया को सही और हार मिलने पर उसी प्रक्रिया को गलत बताना दोहरा रवैया है।
नितिन नवीन ने अपने संबोधन में एसआईआर का भी जिक्र किया। उन्होंने कर्नाटक और बिहार के चुनावी संदर्भों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की आलोचना की। उनका कहना था कि कर्नाटक में जीत मिलने पर विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए गए, जबकि बिहार में हार के बाद वोट चोरी जैसे नारे लगाए जाने लगे। बीजेपी अध्यक्ष ने इसे विपक्ष के राजनीतिक रवैये से जोड़ते हुए कहा कि चुनावी नतीजों के बाद इस तरह के बयान देना जनता के फैसले पर सवाल खड़े करने जैसा है।

हालांकि, एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए सवालों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर अपनी आपत्तियां सामने रखते रहे हैं, जबकि एनडीए के नेता इन आरोपों को चुनावी हार के बाद की प्रतिक्रिया बताते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बयानों के बीच चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा जारी है।
अपने भाषण के दौरान नितिन नवीन ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे समय रहते अपनी स्थिति सुधारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष ने अपनी रणनीति और राजनीतिक रवैये पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में उसके लिए अपनी राजनीतिक जमीन बचाना भी मुश्किल हो सकता है। उनके इस बयान को विपक्षी दलों के खिलाफ एनडीए के राजनीतिक अभियान के एक अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
भागलपुर में कार्यक्रम के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन का स्वागत भी किया। इस मौके पर उन्हें त्रिशूल भेंट किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नारेबाजी के जरिए अपना समर्थन जताया। इसके बाद नितिन नवीन जनसभा स्थल से पदयात्रा के लिए रवाना हुए।
यह पदयात्रा लाजपत पार्क से शुरू हुई। इसके बाद मार्च खरमनचक, भामाशाह चौक और घंटाघर चौक की ओर बढ़ा। करीब एक किलोमीटर की इस पदयात्रा में पार्टी कार्यकर्ताओं और एनडीए समर्थकों ने हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ का संदेश दिया। आयोजन के जरिए एनडीए ने भागलपुर में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने के साथ-साथ विपक्ष के खिलाफ अपने अभियान को भी आगे बढ़ाया।
भागलपुर के अलावा बिहार के दूसरे शहरों में भी एनडीए की ओर से इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में भी रैलियों के माध्यम से विपक्ष पर निशाना साधा गया। इन कार्यक्रमों में एनडीए के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जुड़े मुद्दों को उठाया।

बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों और बयानों पर सवाल उठाए। एनडीए नेताओं का कहना था कि चुनाव के बाद लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक स्थिति पर विचार करना चाहिए।
इन रैलियों और पदयात्राओं के जरिए एनडीए ने बिहार में विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। भागलपुर में नितिन नवीन का बयान इस अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा। उन्होंने चुनावी जीत और हार के बाद लोकतंत्र को लेकर दिए जाने वाले बयानों में अंतर का मुद्दा उठाया और विपक्ष को अपनी भूमिका पर विचार करने की सलाह दी।
दूसरी ओर, एसआईआर और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और राजनीतिक दलों की जवाबदेही जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। लेकिन इस बहस में लगाए जाने वाले आरोपों और उनके जवाबों को तथ्यों तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर परखना भी जरूरी है।
फिलहाल, भागलपुर में नितिन नवीन के बयान और बिहार के अन्य शहरों में हुई एनडीए की रैलियों ने राज्य की राजनीतिक गतिविधियों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एनडीए जहां विपक्ष के लोकतंत्र संबंधी बयानों को चुनावी हार से जोड़ रहा है, वहीं विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में विपक्ष इन आरोपों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच यह बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।
फिलहाल भागलपुर से लेकर बेगूसराय और मुजफ्फरपुर तक एनडीए के कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। नितिन नवीन का यह बयान कि समय रहते नहीं जागे तो विपक्ष की कुर्सी भी नहीं बचेगी, इसी राजनीतिक अभियान का सबसे चर्चित संदेश बनकर सामने आया है।










