नालंदा जिले से एक बेहद गंभीर और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां चोरी के संदेह में दो युवकों की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पिटाई किए जाने के बाद उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना राजगीर क्षेत्र में आयोजित मलमास मेले के दौरान रविवार देर रात की है। मेले में श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान दो युवक वहां पहुंचे थे, जिन पर कुछ लोगों ने चोरी का संदेह जताया। इसके बाद जो हुआ, वह एक दर्दनाक भीड़ हिंसा में बदल गया।
मृतकों की पहचान दीपनगर थाना क्षेत्र के निवासी 24 वर्षीय पिंटू पासवान और 18 वर्षीय श्रवण पासवान के रूप में हुई है। दोनों ही स्थानीय निवासी थे और परिवार से जुड़े सामान्य जीवन जी रहे थे। घटना के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही दोनों युवकों पर चोरी का शक जताया गया, कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और पूछताछ के बजाय मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि इसके बाद भीड़ ने दोनों युवकों को बुरी तरह पीटा। यह मारपीट काफी देर तक चलती रही, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था और किसी ने भी तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया। जब तक स्थिति नियंत्रण में आती, तब तक दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को तत्काल अपने कब्जे में लेकर अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों युवकों ने दम तोड़ दिया।
घटना स्थल राजगीर के झुनकिया बाबा मंदिर के पास बताया जा रहा है। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर स्थिति को नियंत्रित किया और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की और अप्रिय घटना को रोका जा सके।

मृतकों के परिजनों का कहना है कि उन्हें देर रात सूचना मिली थी कि गांव के पास मंदिर क्षेत्र में दो युवकों को चोरी के शक में भीड़ ने पकड़ लिया है और उनकी पिटाई की जा रही है। परिजन तुरंत मौके की ओर रवाना हुए, लेकिन तब तक पुलिस दोनों को अस्पताल ले जा चुकी थी।
मृतक पिंटू पासवान की मां सरोज देवी ने बताया कि उनका बेटा परिवार का सबसे बड़ा सहारा था और मजदूरी कर घर चलाता था। वह पांच भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़ा था और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि अगर समय रहते भीड़ को रोका गया होता, तो दोनों युवकों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि मामले की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भीड़ हिंसा की घटनाएं समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत हैं। किसी भी संदेह की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेना गंभीर अपराध है और इससे निर्दोष लोगों की जान भी जा सकती है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाएगा।










