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पटना PhD प्रदर्शन: पटना में PhD होल्डर्स का जोरदार प्रदर्शन, 19वें दिन भी अनशन जारी; बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी

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पटना PhD प्रदर्शन: पटना में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे PhD होल्डर्स और अतिथि सहायक प्राध्यापकों का प्रदर्शन शनिवार को एक बार फिर जोरदार हो गया। पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन मार्च निकालने की कोशिश की। इस दौरान आर ब्लॉक चौराहे के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत और समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इसी वजह से आंदोलन लगातार जारी है।

शनिवार को जब प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन की ओर मार्च करने की कोशिश की तो प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए आर ब्लॉक चौराहे के पास भारी पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए डबल लेयर बैरिकेडिंग की थी।

हालांकि, प्रदर्शनकारी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थे। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और उसे पार करके आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक तनातनी की स्थिति बनी रही।

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को समझाने और उन्हें पीछे हटाने की कोशिश करते नजर आए। लेकिन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने वाटर कैनन भी मौके पर तैनात किए थे।

पटना PhD प्रदर्शन
पटना PhD प्रदर्शन

19 दिनों से आमरण अनशन

इस आंदोलन की सबसे अहम बात यह है कि कई प्रदर्शनकारी पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

आंदोलन में शामिल कुमुद पटेल भी शनिवार को व्हीलचेयर पर प्रदर्शन स्थल पहुंचे। वे पिछले 19 दिनों से अनशन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान वह काफी भावुक नजर आए। उन्होंने सरकार पर उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

कुमुद पटेल ने भावुक होकर कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार चाहती है कि वह अपनी जान गंवा दें। उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन सिर्फ व्यक्तिगत नौकरी या नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

पटना PhD प्रदर्शन
पटना PhD प्रदर्शन

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?

PhD होल्डर्स और अतिथि सहायक प्राध्यापकों की कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में UGC के नियमों को लागू करना है।

प्रदर्शनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग उम्र सीमा में बढ़ोतरी से जुड़ी है। उनका कहना है कि लंबे समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने वाले गेस्ट फैकल्टी और अन्य योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में उचित अवसर मिलना चाहिए।

इसके अलावा प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित नए नियमों का भी विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि इन नियमों के लागू होने से लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे गेस्ट फैकल्टी प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई शिक्षक वर्षों से कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं और उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अचानक उनकी सेवाओं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा होना उनके लिए बड़ी चिंता का विषय है।

आठ साल से गेस्ट फैकल्टी के तौर पर काम

आंदोलन में शामिल असिस्टेंट गेस्ट प्रोफेसर डॉ. नितिन कुमार ने अपनी स्थिति के बारे में बताया कि उन्हें शुरुआत में केवल 11 महीने के लिए नियुक्त किया गया था। लेकिन इसके बाद भी वे लगातार काम करते रहे और अब करीब आठ साल से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

उनका कहना है कि गेस्ट फैकल्टी ने राज्य के कॉलेजों में पढ़ाई व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कई वर्षों तक सेवाएं देने के बावजूद आज भी उनके सामने नौकरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

डॉ. नितिन कुमार का दावा है कि अब ऐसी नीतियां लाई जा रही हैं, जिनसे लंबे समय से काम कर रहे गेस्ट फैकल्टी को हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि वे सरकार से स्पष्ट नीति और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।

पटना PhD प्रदर्शन
पटना PhD प्रदर्शन

डॉक्टर निखिल कुमार ने भी उठाए सवाल

प्रदर्शन में शामिल डॉक्टर निखिल कुमार ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वे अतिथि सहायक शिक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी नौकरी को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहती है।

डॉ. निखिल कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल वर्तमान शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

उनका कहना है कि अगर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया गया तो इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित

प्रदर्शन के कारण पटना में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। पुलिस ने पटना जंक्शन से आर ब्लॉक की ओर जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया था। इसके चलते इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

आर ब्लॉक चौराहे के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए वाटर कैनन भी तैयार रखे गए थे।

करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन और तनाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा गया। वहीं, कुछ प्रदर्शनकारी पीछे हट गए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

चिराग पासवान भी कर चुके हैं समर्थन

इस आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी PhD होल्डर्स और गेस्ट फैकल्टी के समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने सरकार से गेस्ट फैकल्टी को नियुक्तियों में प्राथमिकता देने की मांग की थी।

चिराग पासवान के समर्थन के बाद प्रदर्शनकारियों को उम्मीद जगी थी कि उनकी मांगों को लेकर सरकार की ओर से जल्द कोई सकारात्मक कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, प्रदर्शनकारी अभी भी सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

फिलहाल पटना में PhD होल्डर्स और अतिथि सहायक प्राध्यापकों का आंदोलन जारी है। 19 दिनों से चल रहे आमरण अनशन और शनिवार को हुए जोरदार प्रदर्शन ने एक बार फिर सरकार के सामने इन शिक्षकों की मांगों को प्रमुखता से ला दिया है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री कार्यालय भेजे गए प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का क्या नतीजा निकलता है और सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती है। फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर ठोस और स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।

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