पूर्णिया कंपनी मारपीट मामला: बिहार के पूर्णिया जिले से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। मरंगा थाना क्षेत्र में एक निजी कंपनी के तीन कर्मचारियों के साथ कथित रूप से बर्बरता और हिंसा का मामला सामने आया है। पीड़ित कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कंपनी परिसर में बुलाकर न सिर्फ बंधक बनाया गया, बल्कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई।
घटना में घायल हुए कर्मचारियों की पहचान संग्राम यादव, अर्जुन कुमार मेहता और इंदु भूषण यादव के रूप में हुई है। तीनों को गंभीर चोटों के चलते पूर्णिया के जीएमसीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना के बाद पीड़ित परिवारों ने मरंगा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पीड़ितों के अनुसार, यह पूरी घटना पूर्णिया के मरंगा बियाडा क्षेत्र में स्थित स्काईलार्क लीड्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर में हुई। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें किसी कार्य या बैठक के बहाने कंपनी परिसर में बुलाया गया था, लेकिन जैसे ही वे वहां पहुंचे, कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और जबरन पकड़ लिया। इसके बाद उनके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वे विरोध न कर सकें।

आरोप है कि इसके बाद उनके साथ लोहे की रॉड, लाठी और डंडों से बुरी तरह मारपीट की गई। पीड़ितों का कहना है कि इस दौरान उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें आईं और वे खुद को बचाने में असमर्थ थे। इस कथित घटना ने कर्मचारियों और उनके परिवारों में डर और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
पीड़ित कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि मारपीट के दौरान उनसे सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए। उनका दावा है कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन दस्तावेजों में क्या लिखा है। उन्हें आशंका है कि इन कागजों का इस्तेमाल भविष्य में किसी गलत या अवैध उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। इस आरोप ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है, क्योंकि यह केवल हिंसा का मामला नहीं रहकर कथित जबरदस्ती और दस्तावेजी दुरुपयोग की ओर भी इशारा करता है।
घायल अर्जुन कुमार मेहता ने मीडिया और पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि घटना के दौरान उनके साथ जातिसूचक शब्दों का भी प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल मारपीट नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से अपमानित करने की भी कोशिश थी। अन्य पीड़ितों ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।

पीड़ितों का यह भी दावा है कि इस पूरी घटना के दौरान कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और प्रबंधन से जुड़े लोग मौके पर मौजूद थे। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि यह सही साबित होते हैं तो मामला और गंभीर कानूनी रूप ले सकता है।
सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि मारपीट के दौरान कर्मचारियों की आंखों और कानों में मिर्च पाउडर डाला गया, जिससे उन्हें अत्यधिक दर्द और जलन का सामना करना पड़ा। पीड़ितों का कहना है कि यह कृत्य उन्हें चुप कराने और प्रतिरोध रोकने के लिए किया गया था। इस तरह की घटनाएं गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में भी आ सकती हैं।
पीड़ितों ने यह भी दावा किया है कि पूरी घटना कंपनी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। उनका कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष रूप से जांच करे और फुटेज को सुरक्षित करे, तो घटना की सच्चाई सामने आ सकती है। यह दावा जांच के लिए एक महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकता है।

घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। मरंगा थाना पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की है और संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का माहौल बना दिया है। आसपास के लोगों में इस बात को लेकर चिंता है कि एक निजी कंपनी परिसर में इस तरह की कथित हिंसक घटना कैसे हो सकती है। कई लोग इसे कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला मान रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल कानून व्यवस्था का उल्लंघन होगा, बल्कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है। वहीं पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं। यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहकर एक गंभीर कानूनी और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।










