विदेश नौकरी ठगी: किशनगंज पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने विशेष टीम और एसटीएफ की मदद से मुख्य आरोपी हाजी नाहिद गनी और उसके सहयोगी मोहम्मद तवरेज को पटना से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पूर्णिया के रहने वाले बताए जा रहे हैं। हाजी नाहिद गनी को AIMIM नेता बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों के खिलाफ किशनगंज और पूर्णिया में विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। आरोप है कि युवाओं को विदेश में बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई का भरोसा दिलाकर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड और ताईबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रेवल्स के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने का काम किया जाता था। आरोपियों की ओर से दुबई, सऊदी अरब, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है।

विदेश में रोजगार की उम्मीद रखने वाले कई युवाओं से कथित तौर पर लाखों रुपये लिए गए। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ युवाओं को निर्धारित प्रक्रिया के बजाय कथित अवैध रास्तों से विदेश भेजा गया। वहां पहुंचने के बाद उन्हें वीजा और तय नौकरी के मुताबिक काम नहीं मिला। कुछ शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि विदेश पहुंचने के बाद युवाओं से उनकी सहमति के विपरीत दूसरे तरह का काम कराया गया।
इस पूरे मामले में विशनपुर थाना क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 47/26 का मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले के शिकायतकर्ता मोहम्मद सुलेमान ने अपने बेटे नूरजफर को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख 80 हजार रुपये लिए जाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के मुताबिक, नूरजफर को 9 सितंबर 2026 को पहले पटना से दिल्ली भेजा गया। इसके बाद उसे थाईलैंड के क्राबी शहर पहुंचाया गया। आरोप है कि 18 सितंबर को उसे कथित डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से मलेशिया में प्रवेश कराया गया।
मलेशिया पहुंचने के बाद नूरजफर को कथित तौर पर कई अन्य युवकों के साथ एक कमरे में रखा गया। इसके बाद उसे जोहोर के सेनाई इलाके में स्थित Biocean Sdn Bhd में काम पर लगाए जाने की बात शिकायत में कही गई है।
मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि इसी दौरान मलेशियाई आव्रजन अधिकारियों ने छापेमारी की, जिसमें कई युवकों को पकड़े जाने की बात कही गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, विदेश भेजे जाने से पहले युवाओं को जिस तरह की नौकरी और सुविधाओं का भरोसा दिया गया था, वास्तविक स्थिति उससे अलग थी।

पुलिस अब इन आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अब तक कितने युवाओं को विदेश भेजा गया और उनसे कितनी रकम वसूली गई।
किशनगंज और सीमांचल के इलाकों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और विदेशों का रुख करते हैं। बेरोजगारी और बेहतर कमाई की उम्मीद के चलते कई युवा विदेश में नौकरी को अपने भविष्य का रास्ता मानते हैं। ऐसे में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के मामले सामने आने पर प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि विदेश भेजे जाने के बाद पीड़ित युवाओं और उनके परिवारों के लिए कानूनी और प्रशासनिक मदद हासिल करना मुश्किल हो सकता है। अगर किसी युवक को गलत दस्तावेजों या अवैध रास्तों के जरिए दूसरे देश भेजा जाता है, तो वहां उसकी स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
किशनगंज पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। साथ ही, पुलिस उन युवाओं और परिवारों की शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बना सकती है, जिन्होंने विदेश में नौकरी के नाम पर रकम दिए जाने का आरोप लगाया है।
पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती भी है कि आरोपियों ने युवाओं को विदेश भेजने के लिए किन दस्तावेजों और माध्यमों का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, जिन ट्रैवल एजेंसियों या अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनकी भी जांच की जा सकती है।
विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में अक्सर बेरोजगार युवाओं को आकर्षक वेतन, बेहतर नौकरी और विदेश में सुरक्षित भविष्य का सपना दिखाया जाता है। इसके बाद उनसे पासपोर्ट, वीजा, टिकट और नौकरी की प्रक्रिया के नाम पर बड़ी रकम ली जाती है। इसलिए नौकरी के लिए विदेश जाने वाले लोगों के लिए एजेंसी और नौकरी की वास्तविकता की जांच करना बेहद जरूरी है।
इस मामले में भी पुलिस की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवाओं को विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की जा रही थी और आरोपियों की भूमिका कितनी व्यापक थी। फिलहाल पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ शुरू कर दी है।

हाजी नाहिद गनी और मोहम्मद तवरेज की गिरफ्तारी को पुलिस की जांच में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों और शिकायतों के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान कथित तौर पर विदेश भेजे गए युवाओं की संख्या कितनी सामने आती है और अब तक कितने परिवारों ने शिकायत की है। अगर जांच में एक बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो पुलिस की कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल, किशनगंज पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी का नेटवर्क कैसे संचालित होता था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और किन-किन युवाओं को इसका शिकार बनाया गया।
किशनगंज में हुई यह कार्रवाई उन बेरोजगार युवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। किसी भी एजेंसी या व्यक्ति को पैसा देने से पहले उसके दस्तावेज, पंजीकरण, नौकरी का ऑफर, वीजा और विदेश में रोजगार की वास्तविक स्थिति की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क के कितने लोगों तक पहुंचती हैं और विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपों में आगे क्या कार्रवाई होती है।










