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श्मशान घाट निर्माण: बहादुरगंज में श्मशान घाट के अभाव से ग्रामीण परेशान, अंतिम संस्कार के लिए झेलनी पड़ रही कठिनाई, प्रशासन से निर्माण की मांग

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श्मशान घाट निर्माण: बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज प्रखंड अंतर्गत समेसर पंचायत के तकिया और मिरधानडांगी गांव के ग्रामीण आज भी एक बुनियादी सुविधा के अभाव में कठिन जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के दावे करती है, वहीं इन दोनों गांवों के लोगों को आज तक एक व्यवस्थित श्मशान घाट की सुविधा नहीं मिल सकी है। इसका सबसे बड़ा असर तब दिखाई देता है जब किसी परिवार में मृत्यु होती है और अंतिम संस्कार के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा का नहीं, बल्कि सम्मानजनक अंतिम विदाई का भी सवाल है। हर बार किसी की मृत्यु होने पर परिवार और गांव के लोगों को असुविधा, असुरक्षा और कठिन परिस्थितियों के बीच अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले लेती है।

वर्षों से श्मशान घाट की मांग, लेकिन अब तक नहीं मिला समाधान

स्थानीय लोगों के अनुसार, तकिया और मिरधानडांगी गांव के लिए श्मशान घाट की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। कई बार पंचायत और प्रशासन के समक्ष इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट के लिए भूमि पहले से उपलब्ध है। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है। सरकारी स्वीकृति और आवश्यक बजट नहीं मिलने के कारण यह परियोजना वर्षों से अधर में लटकी हुई है।

लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में पहल की जाती, तो आज उन्हें इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता।

श्मशान घाट निर्माण
श्मशान घाट निर्माण

अंतिम संस्कार के दौरान होती है भारी परेशानी

श्मशान घाट नहीं होने के कारण ग्रामीणों को खुले स्थानों या अस्थायी जगहों पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। कई बार दूर-दराज के क्षेत्रों में शव ले जाना पड़ता है, जिससे मृतक के परिजनों और ग्रामीणों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।

बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। कीचड़, जलभराव और खराब रास्तों के कारण शव को अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है या वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में दुख की घड़ी और भी अधिक कष्टदायक बन जाती है।

श्मशान तक पहुंचने के लिए नहीं है सड़क

ग्रामीणों ने बताया कि जहां श्मशान घाट के लिए जमीन चिन्हित की गई है, वहां तक पहुंचने के लिए कोई पक्का या कच्चा रास्ता भी नहीं बनाया गया है।

श्मशान परिसर तक पहुंचने के लिए लोगों को खेतों और झाड़ियों के बीच से गुजरना पड़ता है। बरसात में यह रास्ता पूरी तरह फिसलन भरा और जोखिमपूर्ण हो जाता है। कई बार अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को भी चोट लगने का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि श्मशान घाट के निर्माण के साथ-साथ वहां तक पहुंचने के लिए एक मजबूत सड़क का भी निर्माण कराया जाए।

श्मशान घाट निर्माण
श्मशान घाट निर्माण

झाड़ियों और सांप-बिच्छुओं का बना रहता है खतरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, श्मशान के लिए चिन्हित पूरा क्षेत्र घनी झाड़ियों से घिरा हुआ है। नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण वहां सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है।

अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को भय के माहौल में काम करना पड़ता है। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को वहां ले जाना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि परिसर की साफ-सफाई नियमित रूप से कराई जाए और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है।

सम्मानजनक अंतिम संस्कार का सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल एक निर्माण परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति के सम्मानजनक अंतिम संस्कार से जुड़ा संवेदनशील विषय है।

उनका कहना है कि जिस प्रकार जीवन जीने के लिए सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरी हैं, उसी प्रकार मृत्यु के बाद सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी समाज की मूलभूत आवश्यकता है।

लोगों का कहना है कि सरकार को इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।

श्मशान घाट निर्माण
श्मशान घाट निर्माण

 

प्रशासन से की गई कई बार मांग

ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन आवश्यक कदम उठाता, तो यह समस्या काफी पहले समाप्त हो सकती थी।

उन्होंने जिला प्रशासन और प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट निर्माण की स्वीकृति जल्द दी जाए और आवश्यक बजट जारी किया जाए।

समाजसेवियों ने भी उठाई आवाज

इस मुद्दे को लेकर स्थानीय समाजसेवियों ने भी ग्रामीणों का समर्थन किया है। समाजसेवी तौकीर हुसैन ने कहा कि श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा हर गांव में उपलब्ध होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक परिवार या समुदाय की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आवश्यकता है। प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

इस दौरान सोनू सिन्हा, आदित्य सिन्हा, दीपक मंडल, सौरभ साह, सौरभ सिन्हा सहित कई ग्रामीण भी मौजूद रहे और उन्होंने सामूहिक रूप से प्रशासन से समाधान की मांग की।

श्मशान घाट निर्माण
श्मशान घाट निर्माण

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द ही श्मशान घाट निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

उनका कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। अब लोग अपने अधिकार के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि आंदोलन की नौबत आने से पहले ही समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

विकास के दावों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आज भी कई गांव ऐसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं।

उनका मानना है कि यदि पंचायत और प्रशासन मिलकर इस दिशा में गंभीरता से काम करें तो कम समय में श्मशान घाट, पहुंच पथ, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

श्मशान घाट निर्माण
श्मशान घाट निर्माण

निष्कर्ष

बहादुरगंज प्रखंड की समेसर पंचायत के तकिया और मिरधानडांगी गांव में श्मशान घाट का अभाव केवल एक विकास कार्य की कमी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की भावनाओं और सम्मानजनक अंतिम संस्कार से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करता है।

अब ग्रामीणों की उम्मीद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से है कि वे इस मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द श्मशान घाट का निर्माण, पहुंच मार्ग, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे, ताकि लोगों को अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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