बिहार विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी बहस ने सदन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण कर दिया।

चर्चा के दौरान तेजस्वी यादव द्वारा बार-बार हस्तक्षेप किए जाने से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हो गए और अचानक अपनी सीट से खड़े होकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तेजस्वी यादव को कड़े लहजे में टोकते हुए कहा कि वे बीच में न बोलें और चुपचाप उनकी बात सुनें। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा और तेज हो गया।
नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि तेजस्वी यादव अभी राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि तेजस्वी के पिता उनके समकालीन नेता थे और उनके सत्ता से हटने के बाद उनकी माता को मुख्यमंत्री बनाया गया था। इस टिप्पणी को लेकर विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी देखने को मिली।
मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूर्व में विधायकों को तोड़ने की कोशिशें की गई थीं और इसके लिए पैसों की व्यवस्था संदिग्ध स्रोतों से की गई थी। नीतीश कुमार ने दावा किया कि इसी तरह की गतिविधियों के चलते राज्य की राजनीति में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास किया गया।

मुख्यमंत्री के इन आरोपों के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। सदन में नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ देर के लिए विधानसभा की कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। विपक्षी विधायकों ने मुख्यमंत्री के बयान को असंसदीय बताते हुए उनसे माफी की मांग की।
घटनाक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप कर सदन को शांत कराने की कोशिश करनी पड़ी। हालांकि, माहौल पूरी तरह सामान्य होने में समय लगा। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को उजागर कर दिया है।
बजट सत्र के दौरान हुई इस तीखी बहस को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह टकराव आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत दे रहा है।
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