किशनगंज जिले के बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से AIMIM विधायक मो. तौसीफ आलम की राजनीतिक परेशानियां और गहरी होती जा रही हैं। पटना हाईकोर्ट ने विधायक पर नामांकन पत्र में जानकारी छिपाने के आरोपों के मद्देनजर 52-बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र की EVM मशीनों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

यह मामला बहादुरगंज निवासी आसिफ अकरम की शिकायत के बाद सामने आया। आसिफ अकरम ने जिला निर्वाची पदाधिकारी सह जिलाधिकारी विशाल राज को लिखित आवेदन देकर विधायक पर नामांकन के दौरान आवश्यक तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के आधार पर न्यायालय ने एहतियातन यह आदेश जारी किया है।

जिलाधिकारी विशाल राज ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार EVM मशीनों को वादी और प्रतिवादी दोनों की मौजूदगी में सुरक्षित स्थान पर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया किसी भी संभावित जांच या न्यायिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अपनाई जा रही है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है।

इसी प्रकरण में कांग्रेस के पूर्व उम्मीदवार मुसब्बिर आलम ने भी पटना हाईकोर्ट में अलग याचिका दाखिल की है। इस याचिका में भी विधायक तौसीफ आलम पर नामांकन में तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया गया है। यदि कोर्ट इन आरोपों को सही पाए, तो विधायक की विधानसभा सदस्यता रद्द होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में मो. तौसीफ आलम ने AIMIM के टिकट पर बहादुरगंज सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद मसवर आलम को करीब 28,726 मतों के अंतर से पराजित किया था। AIMIM उम्मीदवार को कुल 87,315 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 58,589 वोट प्राप्त हुए थे।
EVM सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह विधायक के लिए गंभीर संकट बन सकता है। फिलहाल AIMIM विधायक तौसीफ आलम की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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