पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को किशनगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। सुभाषपल्ली चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

यह विरोध प्रदर्शन जिला कांग्रेस अध्यक्ष इमाम अली चिंटू की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जबकि ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव शंभू यादव ने इसका नेतृत्व किया। प्रदर्शन में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) असगर अली पीटर, महिला कांग्रेस नेत्री ईला देवी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अरुण कुमार, पूर्व जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष सरफराज खान रिंकू, सलीम, शुभम दास समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि पप्पू यादव हाल के दिनों में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और एक छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे थे। इसी वजह से सरकार ने पुराने मामले को आधार बनाकर उन्हें गिरफ्तार कराया है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पप्पू यादव को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
गौरतलब है कि पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात (6 फरवरी 2026) पटना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी 31 साल पुराने वर्ष 1995 के एक मामले में हुई है। यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और किराए के मकान पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
पटना की एक विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार अनुपस्थित रहने पर सख्त रुख अपनाते हुए पप्पू यादव की गिरफ्तारी का आदेश दिया था। गिरफ्तारी के समय उनके आवास पर काफी गहमागहमी का माहौल रहा। इस दौरान पप्पू यादव ने अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए यहां तक आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की कोशिश की जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पहले इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) और फिर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद अदालत ने उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वर्तमान में वे बेऊर जेल में बंद हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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