किशनगंज स्थित माता गुजरी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को पहला दीक्षांत समारोह बड़े उत्साह और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय के मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी संकाय के कुल 1198 स्नातक विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार डॉ. इच्छित भारत समेत अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, शैक्षणिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।

समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी थे। उनके साथ बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने माता गुजरी यूनिवर्सिटी की सराहना की और कहा कि सीमांचल जैसे सुदूर और पिछड़े क्षेत्र में उच्च शिक्षा का ऐसा संस्थान स्थापित होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के माध्यम से खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदाय और दूरदराज के इलाकों के छात्रों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल रहा है। इससे न केवल क्षेत्र का शैक्षणिक स्तर बढ़ेगा बल्कि आने वाले समय में यहां से बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्ट निकलकर समाज की सेवा करेंगे।

अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहले बिहार में करीब 50 हजार आयुष्मान कार्ड बनाए गए थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 2 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
छात्रों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी निरंतर मेहनत और अध्ययन करता है वही जीवन में आगे बढ़कर डॉक्टर, इंजीनियर या अन्य पेशेवर बनता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन भर सीखते रहने और समाज की सेवा करने का संकल्प लेने की अपील की।
उपमुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को “धरती का भगवान” बताते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग मानवता की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने उद्योग एवं सड़क निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को भी इस क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा का बड़ा केंद्र स्थापित करने के लिए बधाई दी।
दीक्षांत समारोह के दौरान विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया और छात्रों को अपने ज्ञान और कौशल से समाज की सेवा करने का संदेश दिया।
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