बिहार की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब बिहार महिला आयोग के नोटिस पर पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आयोग का नोटिस उन्होंने “रद्दी की टोकरी में फेंक दिया” है और वे अपने बयान से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके इस रुख ने राजनीतिक गलियारों में बहस को और गर्म कर दिया है।

अर्जुन आवास में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद ने कहा कि उनका बयान महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में था और उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास अपने बयान के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं। उनके अनुसार, वे महिलाओं—विशेषकर “बहू-बेटियों”—के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान पप्पू यादव ने मीडिया में सामने आए कथित स्टिंग ऑपरेशन का भी जिक्र किया और फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से उठते रहे “कास्टिंग काउच” के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि मनोरंजन जगत में व्याप्त ऐसी परिस्थितियां कई प्रतिभाओं के लिए घातक साबित होती हैं।
इसी संदर्भ में उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसे उन्होंने बिहार के लिए एक बड़ी क्षति बताया। हालांकि, इस दावे को लेकर पहले भी अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।

सांसद ने आगे कहा कि जब इस तरह के मुद्दे सामने आते हैं, तब कई राजनीतिक दलों की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। उन्होंने अभिनेता सैफ अली खान का हवाला देते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच जैसे अनुभवों की बात खुद कलाकारों द्वारा स्वीकार की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर राजनीति और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संवेदनशील मुद्दों—जैसे महिला सम्मान, कास्टिंग काउच और सार्वजनिक बयानों की मर्यादा—पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ बयान देना बेहद आवश्यक है, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जा सके।
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