केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी डिजिटल कृषि पहल एग्रीस्टैक में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आशुतोष द्विवेदी, जिलाधिकारी कटिहार, को राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान पटना स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित एक राज्य स्तरीय समारोह में प्रदान किया गया, जहां उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक दिया गया।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव, निदेशक कृषि और एग्रीस्टैक के नोडल अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इस अवसर पर मंत्री ने कटिहार जिले की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि जिले ने एग्रीस्टैक परियोजना के तहत किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने में पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल किया है, जो अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
एग्रीस्टैक परियोजना को ‘किसानों का डिजिटल आधार’ भी कहा जाता है। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक किसान के लिए एक यूनिक फार्मर आईडी तैयार की जाती है, जिसमें उसकी भूमि, फसल, मिट्टी की गुणवत्ता और विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहीत किया जाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसी योजनाओं में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है।

कटिहार जिले ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य करते हुए रिकॉर्ड समय में 2.87 लाख किसानों का सत्यापन कर फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूरा किया। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए जिला प्रशासन ने 16 प्रखंडों में विशेष अभियान चलाया। गांव-गांव कैंप लगाकर किसानों का पंजीकरण किया गया, जिसमें राजस्व कर्मचारियों, कृषि समन्वयकों और वीएलई (ग्राम स्तरीय उद्यमियों) की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जिसने समन्वित रूप से इस कार्य को अंजाम दिया।

जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने इस पूरी प्रक्रिया की स्वयं निगरानी की। उन्होंने नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित कीं और पिछड़े एवं दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर स्वयं कैंप लगवाने की व्यवस्था सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व और प्रशासनिक सक्रियता का ही परिणाम रहा कि कटिहार राज्य में शीर्ष स्थान हासिल कर सका।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डीएम द्विवेदी ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पूरी टीम और किसानों के सहयोग को दिया। उन्होंने राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ही यह लक्ष्य संभव हो पाया है।

उन्होंने यह भी बताया कि फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को खाद-बीज पर सब्सिडी, आपदा राहत और अन्य सरकारी लाभ सीधे और त्वरित रूप से उपलब्ध हो सकेंगे। इससे न केवल योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
डीएम को मिली 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का उपयोग जिला कृषि कार्यालय में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा, ताकि भविष्य में भी इस तरह की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
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