किशनगंज सिग्नल फेल: किशनगंज में सोमवार सुबह रेलवे परिचालन अचानक प्रभावित हो गया। मांगूरजान और तीन माइल स्टेशन के बीच सिग्नल सिस्टम में तकनीकी खराबी आने के कारण इस रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही धीमी पड़ गई। सिग्नल फेल होने की वजह से रेलवे को कई ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा। इस दौरान यात्रियों को काफी देर तक ट्रेनों के चलने का इंतजार करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 4 बजकर 50 मिनट पर मांगूरजान और तीन माइल स्टेशन के बीच सिग्नल व्यवस्था में तकनीकी समस्या सामने आई। सिग्नल सिस्टम के काम नहीं करने के कारण ट्रेनों के संचालन में सावधानी बरतनी पड़ी। रेलवे ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की रफ्तार कम कर दी और कई ट्रेनों को उनके संबंधित स्टेशनों पर रोक दिया गया।
सिग्नल फेल होने की समस्या के बीच रेलवे की परेशानी उस वक्त और बढ़ गई, जब इसी सेक्शन में एक मालगाड़ी का इंजन भी खराब हो गया। मालगाड़ी के इंजन में आई तकनीकी खराबी के कारण ट्रैक पर परिचालन को सामान्य बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बन गया। एक तरफ सिग्नल सिस्टम प्रभावित था, वहीं दूसरी तरफ मालगाड़ी का खराब इंजन भी रेल परिचालन में बाधा पैदा कर रहा था।
स्थिति की जानकारी मिलते ही रेलवे की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने सिग्नल सिस्टम की जांच शुरू की और खराबी को दूर करने के लिए लगातार काम किया। रेलवे की टीम ने करीब चार घंटे तक तकनीकी समस्या को ठीक करने के लिए मशक्कत की। इसके बाद सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट पर सिग्नल व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया गया।

हालांकि सिग्नल सिस्टम ठीक होने के बाद भी सुबह के दौरान प्रभावित हुई ट्रेनों का असर कुछ समय तक देखने को मिला। ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकने और परिचालन की गति कम करने के कारण कई ट्रेनों के निर्धारित समय में बदलाव हुआ। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लगा।
सिग्नल फेल होने का असर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ट्रेनों पर भी देखने को मिला। नई दिल्ली से डिब्रूगढ़ जाने वाली 20506 राजधानी एक्सप्रेस को किशनगंज स्टेशन पर करीब दो घंटे तक रोकना पड़ा। राजधानी एक्सप्रेस सुबह करीब 10 बजकर 44 मिनट पर किशनगंज स्टेशन पहुंची और लगभग दो घंटे के इंतजार के बाद दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर स्टेशन से रवाना हुई।
राजधानी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन के लंबे समय तक स्टेशन पर खड़े रहने के कारण यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को अपने आगे के सफर के लिए इंतजार करना पड़ा। कुछ यात्रियों को अपने निर्धारित समय पर गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई।
इसके अलावा पदातिक एक्सप्रेस भी सिग्नल संबंधी तकनीकी खराबी से प्रभावित हुई। इस ट्रेन को किशनगंज स्टेशन पर करीब 54 मिनट तक रोकना पड़ा। वहीं कामाख्या-बेंगलुरु एक्सप्रेस को भी लगभग आधे घंटे तक स्टेशन पर खड़ा रखना पड़ा। अलग-अलग ट्रेनों के प्रभावित होने के कारण रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही और इंतजार का समय बढ़ गया।
ट्रेनों के रुकने के दौरान रेलवे की ओर से स्टेशन पर लगातार अनाउंसमेंट किए जाते रहे। यात्रियों को सिग्नल सिस्टम में आई तकनीकी खराबी और उसके कारण प्रभावित हुए रेल परिचालन की जानकारी दी जाती रही। रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों को स्थिति सामान्य होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की।
रेलवे के सामने एक और चुनौती खराब मालगाड़ी के इंजन को हटाने की थी। कर्मचारियों ने तकनीकी टीम की मदद से खराब इंजन को हटाकर ट्रैक को खाली कराया। ट्रैक खाली होने और सिग्नल सिस्टम को दुरुस्त किए जाने के बाद धीरे-धीरे रेल परिचालन सामान्य होने लगा।

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, सिग्नल सिस्टम में आई तकनीकी खराबी को ठीक कर लिया गया है और अब संबंधित रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से किया जा रहा है। रेलवे की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि फिलहाल सिग्नल व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है।
सुबह के समय हुई इस तकनीकी खराबी ने एक बार फिर रेलवे के सिग्नल सिस्टम की अहमियत को सामने ला दिया। ट्रेनों का सुरक्षित और सुचारु संचालन सिग्नल व्यवस्था पर काफी हद तक निर्भर करता है। ऐसे में जब किसी रेलखंड पर सिग्नल सिस्टम में खराबी आती है तो ट्रेनों की गति और संचालन को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है।
रेलवे ने भी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित सेक्शन में ट्रेनों की आवाजाही को नियंत्रित किया। यही वजह रही कि कई ट्रेनों को रास्ते में या स्टेशनों पर रोकना पड़ा। हालांकि इससे यात्रियों को परेशानी हुई, लेकिन सिग्नल व्यवस्था बहाल होने तक ट्रेनों के संचालन में सावधानी बरती गई।
मांगूरजान और तीन माइल के बीच हुई इस तकनीकी खराबी के कारण सुबह से लेकर बाद में चलने वाली कई ट्रेनों के समय पर असर पड़ा। खास तौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा। राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के यात्रियों को स्टेशन पर अतिरिक्त समय बिताना पड़ा।
करीब चार घंटे की तकनीकी मशक्कत के बाद सिग्नल सिस्टम बहाल होने से रेलवे ने राहत की सांस ली। मालगाड़ी के खराब इंजन को हटाने के बाद ट्रैक भी खाली हो गया और इसके बाद परिचालन को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाया गया।

फिलहाल रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य है और सिग्नल व्यवस्था पूरी तरह ठीक कर दी गई है। हालांकि तकनीकी खराबी के कारण सुबह जिन ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ, उनके यात्रियों को घंटों की देरी का सामना करना पड़ा।
किशनगंज में हुई यह घटना बताती है कि रेलवे के लिए सिग्नल सिस्टम कितना महत्वपूर्ण है। कुछ घंटों की तकनीकी खराबी का असर एक साथ कई ट्रेनों और हजारों यात्रियों की यात्रा पर पड़ सकता है। फिलहाल समस्या दूर हो चुकी है और रेलवे परिचालन सामान्य पटरी पर लौट आया है।










