बेखौफ जुबां बे बाक अंदाज

कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला: कटिहार की DPO रूबी कुमारी पर EOU का शिकंजा, 7 साल में 11 जगह खरीदी जमीन; आय से 2.45 करोड़ अधिक संपत्ति का आरोप

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कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला: बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने शिक्षा विभाग की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रूबी कुमारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की अलग-अलग टीमों ने किशनगंज और कटिहार में उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। इस कार्रवाई में कुल चार स्थानों पर तलाशी ली गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि रूबी कुमारी ने अपने पति के साथ मिलकर सरकारी सेवा के दौरान ज्ञात आय के स्रोतों से काफी अधिक संपत्ति अर्जित की है। शुरुआती जांच में करीब 2 करोड़ 45 लाख 84 हजार रुपये की कथित आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया है। अब इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।

दरअसल, रूबी कुमारी कटिहार जिले में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी यानी DPO के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत और उससे जुड़े तथ्य मिले थे। इसके बाद एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आए वित्तीय तथ्यों के आधार पर आर्थिक अपराध थाना में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। एजेंसी के मुताबिक, रूबी कुमारी और उनके पति पर आरोप है कि दोनों ने मिलकर अपनी ज्ञात आय के मुकाबले लगभग 2 करोड़ 45 लाख 84 हजार रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की। जांच में इस कथित अतिरिक्त संपत्ति का अनुपात उनकी ज्ञात आय से करीब 87.49 प्रतिशत अधिक बताया गया है।

कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला
कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला

आर्थिक अपराध इकाई की जांच में सबसे महत्वपूर्ण बात जमीन की खरीदारी को लेकर सामने आई है। शुरुआती जांच के अनुसार, वर्ष 2018 से लेकर 2025 के बीच कटिहार जिले में 11 अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदी गई। यानी लगभग सात वर्षों के दौरान लगातार संपत्ति में निवेश किए जाने की जानकारी एजेंसी को मिली है। अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन जमीनों की खरीदारी के लिए धन कहां से आया और इसके लिए इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत क्या था। जमीन खरीदने के समय संबंधित दस्तावेजों में दर्ज कीमत, भुगतान के तरीके और बैंक खातों से हुए लेन-देन का भी मिलान किया जा रहा है।

जांच में एक पांच मंजिला मकान का मामला भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, करीब दो कट्ठा जमीन पर पांच मंजिला इमारत का निर्माण कराया जा रहा है। आर्थिक अपराध इकाई अब इस निर्माण पर हुए खर्च का आकलन करने में जुटी है। एजेंसी यह जांच करेगी कि मकान के निर्माण में कितनी राशि खर्च हुई, निर्माण कार्य कब शुरू हुआ और इसके लिए भुगतान किस माध्यम से किया गया। इसके साथ ही जमीन और भवन की वास्तविक बाजार कीमत तथा दस्तावेजों में दर्ज मूल्य के बीच अंतर की भी पड़ताल की जा सकती है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि संपत्ति रूबी कुमारी के नाम पर खरीदी गई है या उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी कोई निवेश किया गया है।

रूबी कुमारी के पति रेलवे विभाग में सीनियर टीटीई के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में आर्थिक अपराध इकाई दोनों की आय और संपत्ति का अलग-अलग हिसाब तैयार कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पति-पत्नी की कुल वैध आय कितनी थी और उस आय के मुकाबले उनके पास कितनी चल-अचल संपत्ति मौजूद है। इसमें वेतन, बैंक जमा, निवेश, जमीन की खरीदारी, मकान निर्माण और दूसरे वित्तीय लेन-देन को शामिल किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कहीं संपत्ति खरीदने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला
कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला

मंगलवार सुबह शुरू हुई छापेमारी के दौरान जांच टीम को रूबी कुमारी अपने निर्धारित आवास पर नहीं मिलीं। इसके बाद अधिकारियों ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की। बताया जा रहा है कि टीम ने कटिहार के लाइनपाड़ा स्थित एक किराए के मकान में भी पहुंचकर उनकी तलाश की। वहीं, उनके कार्यालय में भी आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों ने करीब पांच घंटे तक जांच-पड़ताल की। कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों, फाइलों और अन्य जरूरी रिकॉर्ड की जांच की गई। टीम ने यह जानने की कोशिश की कि पद पर रहते हुए उनके वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े मामलों में किस तरह के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी का मुख्य फोकस संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड पर रहा। अधिकारियों की टीम बैंक खातों, जमीन की रजिस्ट्री, निवेश से संबंधित कागजात और अन्य वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा संपत्ति खरीदने के लिए किए गए भुगतान और अलग-अलग खातों में जमा रकम की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि रूबी कुमारी और उनके पति की घोषित आय के मुकाबले उनके पास मौजूद संपत्ति कितनी है और इस अंतर के पीछे क्या कारण हैं।

आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर संबंधित अधिकारी की वैध आय और खर्च का विस्तृत आकलन करती हैं। इसमें सरकारी वेतन, अन्य वैध आय, परिवार के खर्च, संपत्ति की खरीदारी, बैंक जमा और निवेश जैसे पहलुओं को देखा जाता है। इसके बाद कुल संपत्ति और ज्ञात आय के बीच अंतर का निर्धारण किया जाता है। रूबी कुमारी के मामले में भी आर्थिक अपराध इकाई इसी प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।

कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला
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इस पूरे मामले में 2018 से 2025 के बीच खरीदी गई 11 जमीनों की जानकारी जांच का एक प्रमुख आधार बन सकती है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि इन जमीनों की खरीदारी किस समय हुई, उस समय रूबी कुमारी और उनके पति की आय कितनी थी और भुगतान के लिए किन बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। पांच मंजिला मकान के निर्माण पर खर्च हुई रकम की भी जांच की जाएगी। यदि दस्तावेजों में दर्ज संपत्ति और वास्तविक निवेश के बीच कोई अंतर मिलता है, तो एजेंसी उसके आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की छापेमारी और जांच की कार्रवाई जारी है। हालांकि, तलाशी के दौरान कितने दस्तावेज, नकदी या अन्य सामान बरामद हुए हैं, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच एजेंसी की ओर से भी जब्ती और तलाशी से जुड़ी अंतिम जानकारी सामने आना बाकी है।

कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला
कटिहार DPO भ्रष्टाचार मामला

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूबी कुमारी शिक्षा विभाग में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात हैं। सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी आय और संपत्ति से जुड़े नियमों का पालन करें। ऐसे में आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

हालांकि, फिलहाल इस मामले में सामने आई जानकारियां जांच एजेंसी के आरोपों और शुरुआती जांच पर आधारित हैं। किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जा सकता है, जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आरोप साबित हों। अब देखना होगा कि आर्थिक अपराध इकाई की आगे की जांच में कौन-कौन से दस्तावेज और वित्तीय तथ्य सामने आते हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

 

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