मामला पूर्णिया जिले का है। ठगी का शिकार हुए युवक की पहचान चूनापुर निवासी जीवछ कुमार यादव के रूप में हुई है। पीड़ित ने इस घटना को लेकर साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने, आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने और खाते से निकाली गई एक लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की मांग की है।

पीड़ित जीवछ कुमार यादव के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट पर उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अमित कुमार बताया और खुद को उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक का कर्मचारी बताया। बातचीत के दौरान उसने जीवछ कुमार को जानकारी दी कि उनका बैंक खाता ब्लॉक हो गया है। उसने दावा किया कि खाते को दोबारा चालू कराने के लिए उन्हें बैंक में कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
कॉल करने वाले ने युवक से कहा कि वह अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर बैंक पहुंचे, ताकि खाते से जुड़ी समस्या का समाधान किया जा सके। शुरुआत में यह बातचीत सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया जैसी लगी। यही वजह रही कि पीड़ित को फोन करने वाले व्यक्ति पर शक नहीं हुआ। उन्हें लगा कि शायद वास्तव में बैंक खाते में कोई तकनीकी या दस्तावेज संबंधी परेशानी आ गई है।
जीवछ कुमार ने फोन करने वाले को बताया कि वह कुछ देर बाद बैंक पहुंचेंगे। लेकिन ठग ने इसी दौरान उन्हें बातचीत में उलझाना शुरू कर दिया। वह लगातार बैंक खाते और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी बातें करता रहा। उसने बैंक का IFSC कोड और दूसरी तकनीकी जानकारियां भी बताईं। इन जानकारियों के जरिए वह पीड़ित के सामने खुद को बैंक का वास्तविक कर्मचारी साबित करने की कोशिश कर रहा था।
ठग की बातचीत का तरीका इतना भरोसेमंद था कि पीड़ित काफी देर तक उसकी बातों में उलझे रहे। आरोपी लगातार फोन पर बातचीत करता रहा और इस तरह समय बीतता गया। इसी दौरान युवक के बैंक खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

बताया गया है कि ठगों ने जीवछ कुमार के बैंक खाते से दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए रकम निकाल ली। पहला ट्रांजैक्शन सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर हुआ। इस दौरान उनके खाते से 50 हजार रुपये कट गए। इसके कुछ ही समय बाद दूसरा ट्रांजैक्शन किया गया। सुबह करीब 11 बजकर 51 मिनट पर खाते से फिर 50 हजार रुपये निकाल लिए गए।
इस तरह महज 21 मिनट के अंतराल में पीड़ित के खाते से कुल एक लाख रुपये की निकासी हो गई। दोनों ट्रांजैक्शन के बाद मोबाइल पर पैसे कटने के मैसेज आए। जब जीवछ कुमार ने खाते से रकम निकलने की जानकारी देखी, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हो चुकी है।
इसके बाद पीड़ित ने बिना देर किए बैंक पहुंचकर अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर फोन किया था और खाते से जुड़ी जानकारी देने के बहाने उन्हें बातचीत में उलझाए रखा। इसी दौरान उनके खाते से दो बार में 50-50 हजार रुपये निकाल लिए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़ित का बैंक खाता लॉक कर दिया, ताकि खाते से आगे किसी तरह का लेन-देन न हो सके। इसके साथ ही जीवछ कुमार ने बैंक प्रबंधन को लिखित शिकायत भी सौंपी और पूरे मामले की जानकारी दी।
पीड़ित के मुताबिक, ठग के साथ उनकी करीब एक घंटे 22 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। इतनी लंबी बातचीत के दौरान आरोपी ने लगातार उन्हें अपने भरोसे में बनाए रखा। बैंक का IFSC कोड और तकनीकी जानकारियों का इस्तेमाल कर उसने ऐसा माहौल बनाया, जिससे युवक को लगा कि वह वास्तव में बैंक का कर्मचारी है।

अब इस मामले में साइबर पुलिस से जांच की मांग की गई है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान करना और उन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों का पता लगाना है, जिनके जरिए ठगी की रकम आगे भेजी गई। जांच में कॉल करने वाले मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन का समय और रकम प्राप्त करने वाले खातों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के नए-नए तरीकों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ठग अब केवल लिंक भेजकर या फर्जी मैसेज के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि बैंक अधिकारियों की तरह बातचीत करके भी लोगों का भरोसा जीत रहे हैं। वे बैंकिंग से जुड़ी तकनीकी जानकारियों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि सामने वाले व्यक्ति को उन पर शक न हो।
ऐसे मामलों में बैंक खाते के ब्लॉक होने, केवाईसी अपडेट कराने, आधार-पैन सत्यापन और खाते को दोबारा चालू करने के नाम पर लोगों को फोन किया जाता है। कई बार ठग खुद को बैंक मैनेजर, कस्टमर केयर अधिकारी या अन्य बैंक कर्मचारी बताकर बातचीत शुरू करते हैं। उनका मकसद किसी न किसी तरीके से व्यक्ति को भ्रमित करना और उसके खाते से रकम निकालना होता है।
बैंक ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि किसी अनजान व्यक्ति के फोन पर भरोसा करके अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड या सीवीवी नंबर नहीं बताना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता ब्लॉक होने या केवाईसी अपडेट कराने की बात कहता है, तो सबसे पहले बैंक की आधिकारिक शाखा या आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर से इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत बैंक को सूचना देकर खाते और संबंधित भुगतान माध्यम को सुरक्षित कराना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट करनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
फिलहाल पूर्णिया के चूनापुर निवासी जीवछ कुमार यादव ने साइबर थाने में शिकायत देकर एक लाख रुपये वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में ठगों की पहचान कब तक हो पाती है और पीड़ित को उसकी मेहनत की कमाई वापस मिल पाती है या नहीं।
एक फोन कॉल, बैंक कर्मचारी होने का दावा और करीब एक घंटे 22 मिनट की बातचीत… इसी दौरान युवक के खाते से एक लाख रुपये गायब हो गए। यह घटना बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़ा सबक है कि अनजान कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।










