पूर्णिया में आयोजित इस पदयात्रा में हिमंत बिस्वा सरमा ने करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर हिस्सा लिया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच उन्होंने अपना संबोधन दिया। कार्यक्रम का नाम ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रखा गया था। बीजेपी की इस पदयात्रा के जरिए विपक्षी दलों पर राजनीतिक हमला बोला गया और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश की गई।
अपने भाषण में हिमंत बिस्वा सरमा ने सबसे पहले राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने किसी का वोट नहीं चुराया है, बल्कि जनता का विश्वास और दिल जीता है। उनका कहना था कि चुनाव में जनता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करती है और उसी के फैसले से सरकार बनती है। बीजेपी की चुनावी सफलता को उन्होंने जनता के समर्थन से जोड़ते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।

हिमंत सरमा ने इस दौरान राहुल गांधी पर तंज कसने के लिए क्रिकेट का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में शतकों का शतक बनाया है, जबकि राहुल गांधी ने चुनाव हारने का शतक बनाया है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन पर निशाना साधा। उनका यह बयान राजनीतिक मंच से दिया गया एक कटाक्ष था, जिसने कार्यक्रम के दौरान चर्चा का विषय बनाया।
दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष की ओर से चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी कई बार सवाल उठाए गए हैं। वहीं बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं और प्रक्रिया पर सवाल उठाने का आरोप लगाती रही है। पूर्णिया में हिमंत बिस्वा सरमा का बयान भी इसी राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है।
अपने संबोधन में असम के मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जनता की भावनाओं से जुड़ा विषय है। इसके साथ ही उन्होंने बाबर और औरंगजेब के नामों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची से ऐसे नाम हटाए जाने की बात कही। उन्होंने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया को जारी रखने की अपील भी की।

हालांकि, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निर्धारित चुनावी नियमों के तहत होती है। किसी व्यक्ति का नाम केवल निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक आधार पर ही हटाया जा सकता है। ऐसे में हिमंत सरमा की इस टिप्पणी को उनके राजनीतिक संबोधन के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर आगे किस तरह की प्रशासनिक या चुनावी प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह संबंधित नियमों और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने भाषण में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर भी विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता जब ईवीएम के जरिए चुनाव जीतते हैं तो मशीन को सही बताते हैं, लेकिन चुनाव हारने के बाद उसी मशीन पर सवाल उठाने लगते हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष का यह रवैया दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में केरल, असम और बिहार के चुनावों का भी जिक्र किया। हिमंत सरमा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे पक्ष में आने पर ईवीएम की विश्वसनीयता स्वीकार कर ली जाती है, जबकि हार मिलने पर मशीन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से चुनावी नतीजों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को स्वीकार करने की बात कही।

दूसरी ओर, ईवीएम को लेकर विपक्ष की ओर से समय-समय पर पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा भारतीय राजनीति में लगातार बहस का विषय बना हुआ है। बीजेपी और विपक्ष के बीच इस सवाल पर अलग-अलग राजनीतिक दावे और तर्क सामने आते रहे हैं।
अपने संबोधन के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को लेकर एक और विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बांग्लादेश भेज देंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। इस तरह की टिप्पणी पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह बयान पूर्णिया में आयोजित पदयात्रा के दौरान उनके भाषण का हिस्सा था।
हिमंत सरमा के पूरे संबोधन में राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना बनाया गया। उन्होंने वोट चोरी के आरोपों को खारिज किया, चुनावी हार को लेकर राहुल गांधी पर कटाक्ष किया और ईवीएम के मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना की। साथ ही राम मंदिर और मतदाता सूची से जुड़े विषयों को भी अपने भाषण में शामिल किया।
पूर्णिया में हुई इस पदयात्रा को बीजेपी के राजनीतिक अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने विपक्ष की राजनीति और चुनावी आरोपों पर सवाल उठाए। हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और राजनीतिक महत्व दिया। करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद उन्होंने लोगों को संबोधित किया और पार्टी का पक्ष रखा।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर साफ है कि वोट चोरी, ईवीएम, चुनाव आयोग और मतदाता सूची जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। एक ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए जनता के समर्थन का दावा कर रही है।
अब देखना होगा कि हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों पर कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। खासकर बांग्लादेश भेजने वाली टिप्पणी और मतदाता सूची से जुड़े उनके बयान पर राजनीतिक बहस आगे बढ़ सकती है। फिलहाल पूर्णिया की इस पदयात्रा में दिया गया उनका संबोधन बिहार की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में भी चर्चा का विषय बन गया है।










