किशनगंज जिले में वर्ष 2025 के दौरान यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस की सख्त कार्रवाई के सकारात्मक और दूरगामी परिणाम सामने आए हैं। पूरे वर्ष चले विशेष यातायात अभियान के तहत किशनगंज पुलिस ने कुल 2,00,60,600 रुपये का जुर्माना वसूला है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा केवल आर्थिक वसूली का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, अनुशासन और जन-जागरूकता में आए सुधार का प्रमाण है।

पुलिस के अनुसार, यह अभियान मुख्य रूप से बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, गलत दिशा में वाहन संचालन, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों के वाहन चलाने, ओवरस्पीडिंग और सीट बेल्ट न लगाने जैसे मामलों पर केंद्रित रहा। इन नियमों के उल्लंघन से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था।

किशनगंज के पुलिस अधीक्षक सागर कुमार के निर्देश पर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में लगातार विशेष वाहन जांच अभियान चलाए गए। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों पर भी नियमित चेकिंग की गई। इस दौरान ई-चालान प्रणाली का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया, जिससे जुर्माना वसूली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और भ्रष्टाचार-मुक्त बनी।

महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 में सबसे अधिक 33,46,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके बाद नवंबर में 25,57,500 रुपये और जून महीने में 22,13,000 रुपये की वसूली दर्ज की गई। वहीं, सितंबर में सबसे कम 9,86,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया, जिसे पुलिस जागरूकता अभियानों का सकारात्मक असर मान रही है।

पुलिस की इस सख्ती का असर जमीनी स्तर पर भी साफ नजर आ रहा है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने बताया कि शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या में काफी कमी आई है। पहले जहां प्रमुख चौराहों पर घंटों जाम लगता था, अब वहां यातायात अपेक्षाकृत सुचारू रूप से चल रहा है। इसके अलावा, वाहन चालकों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोग अब हेलमेट और सीट बेल्ट का नियमित उपयोग करने लगे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी यह अभियान और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा। उनका मानना है कि जुर्माने के माध्यम से एकत्र की गई राशि केवल राजस्व का स्रोत नहीं है, बल्कि इसका असली उद्देश्य लोगों में यातायात नियमों के पालन की संस्कृति विकसित करना है।
किशनगंज पुलिस की यह पहल अब अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है, जहां सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इसी तरह के व्यापक और तकनीक-आधारित अभियानों की जरूरत महसूस की जा रही है।
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