जिले में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए अवैध नर्सिंग होम मरीजों की जान के लिए लगातार खतरा बनते जा रहे हैं। लापरवाही के चलते हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला शहर के मारवाड़ी कॉलेज रोड स्थित निशा नर्सिंग होम का है, जहां एक महिला मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया। घटना के बाद नर्सिंग होम संचालक और कर्मी ताला लगाकर फरार हो गए, यहां तक कि नर्सिंग होम का बोर्ड भी हटा दिया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, बीते दिनों प्रसव पीड़ा उठने पर कोचाधामन थाना क्षेत्र के डेरामारी पंचायत अंतर्गत बाबन गांव निवासी अनसरी बेगम (पति अंजार आलम) को निशा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। वहां मौजूद चिकित्सक द्वारा महिला का ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ ही देर बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद नर्सिंग होम प्रबंधन ने उसे आनन-फानन में सिलीगुड़ी रेफर कर दिया।
परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से मृतिका की किडनी क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिलीगुड़ी में स्थिति गंभीर होने पर उसे पूर्णिया ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। अंततः बुधवार को इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजन उसका शव लेकर इमाम नगर स्थित निशा नर्सिंग होम पहुंचे और जमकर हंगामा किया। हंगामा बढ़ता देख नर्सिंग होम संचालक व कर्मचारी मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम को अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था।

मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नर्सिंग होम की लापरवाही उजागर होने के बाद संचालक द्वारा मृतिका के पति अंजार आलम के साथ पंचायती कराई गई। इस दौरान 1000 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर एक इकरारनामा तैयार किया गया। इकरारनामे में यह लिखा गया कि मरीज के इलाज में हुए खर्च का 75 प्रतिशत भुगतान नर्सिंग होम संचालक करेगा, जबकि 25 प्रतिशत खर्च परिजन वहन करेंगे। इसके साथ ही यह शर्त भी दर्ज की गई कि यदि मरीज की मौत हो जाती है, तो परिजन किसी प्रकार का हंगामा या कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे। हालांकि यह भी लिखा गया कि यदि संचालक 75 प्रतिशत राशि का भुगतान नहीं करता है, तो परिजन कोई भी कदम उठा सकते हैं।

इस इकरारनामे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इस तरह के कागजी समझौते से डॉक्टर और नर्सिंग होम संचालक की कानूनी और नैतिक जवाबदेही खत्म हो जाती है? क्या यह कानून को गुमराह करने की कोशिश नहीं है?
उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी विशाल राज द्वारा पहले ही अवैध नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए जा चुके हैं। बीते दिनों जिले में कई अवैध पैथोलॉजी और नर्सिंग होम को सील भी किया गया था। बावजूद इसके, आज भी जिले के गली-मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों तक दर्जनों अवैध नर्सिंग होम धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
बुद्धिजीवी वर्ग और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि ऐसे नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अवैध नर्सिंग होम में मरीज की मौत के बाद अक्सर परिजन सड़क जाम या हंगामा करते हैं, जिससे विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, लेकिन दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कराया जाता। नतीजतन, ऐसे संचालकों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।

जानकारों के अनुसार, किशनगंज जिले में हर साल नर्सिंग होम की लापरवाही से दर्जनों मरीजों की मौत होती है। अधिकतर मामलों में परिजन कुछ रुपये लेकर मामला रफा-दफा कर देते हैं, जिससे अवैध रूप से नर्सिंग होम चलाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
इस मामले में भी खबर लिखे जाने तक परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी। सूत्रों की मानें तो घटना के बाद कई बिचौलिए भी सक्रिय हो गए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि मामला पुलिस तक पहुंचता है या फिर समझौते के तहत इसे यहीं समाप्त कर दिया जाता है।
बहरहाल, जरूरत इस बात की है कि ऐसे अवैध नर्सिंग होम संचालकों को सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके और आम लोगों की जान से खिलवाड़ बंद हो।
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