किशनगंज जिले के सदर अस्पताल किशनगंज में एक नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामा और नारेबाजी हुई, जिससे कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।

प्रसव के छह दिन बाद हुई मौत
मोतीबाग निवासी कालू मंडल ने बताया कि उन्होंने छह दिन पहले अपनी पत्नी को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। प्रसव सामान्य रूप से हुआ, लेकिन जन्म के बाद नर्सिंग स्टाफ ने नवजात को कमजोर बताया। इसके बाद बच्चे को विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, इलाज के दौरान अचानक उन्हें बच्चे की मौत की सूचना दी गई। इस खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया।

“रात में डॉक्टर नहीं थे मौजूद”
कालू मंडल का आरोप है कि जिस रात बच्चे की हालत बिगड़ी, उस समय ड्यूटी पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि समय पर डॉक्टर की निगरानी और उचित इलाज मिलता, तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने दावा किया कि एसएनसीयू जैसी संवेदनशील इकाई में 24 घंटे डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन अस्पताल में यह व्यवस्था नहीं थी।

अस्पताल परिसर में विरोध
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ समय तक अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
वहीं अस्पताल के उपाधीक्षक अनवर हुसैन ने बताया कि उन्हें लिखित शिकायत मिली है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर रही है। सदर अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नवजातों की देखभाल को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
फिलहाल परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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