किशनगंज में सुरजापुरी भाषा और लोकसंस्कृति को समर्पित प्रथम सुरजापुरी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सम्राट अशोक भवन के समीप स्थित मोटर जांच केंद्र परिसर में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक उपस्थित रहे।

भाषा नहीं, समृद्ध सभ्यता है सुरजापुरी: डीएम
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि सुरजापुरी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक समरसता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह भाषा जाति और धर्म की सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ने का कार्य करती है।
डीएम ने इस महोत्सव को सुरजापुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने विशेष रूप से नई पीढ़ी, खासकर बच्चों और युवाओं से इस सांस्कृतिक धरोहर को आत्मसात करने और आगे बढ़ाने की अपील की। उनका कहना था कि यदि युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे, तो भाषा और संस्कृति स्वतः सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से सुरजापुरी भाषा को न केवल किशनगंज, बल्कि जिले और राज्य की सीमाओं से बाहर भी व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

विविधता में एकता का प्रतीक है यह आयोजन: एसपी
पुलिस अधीक्षक ने आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि भारत विविध भाषाओं और संस्कृतियों का देश है, जहां सभी समुदाय मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने सुरजापुरी महोत्सव को इस क्षेत्र की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।
एसपी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहला महोत्सव आने वाले वर्षों में और व्यापक स्वरूप लेगा तथा सुरजापुरी संस्कृति को पूरे बिहार और देश में नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।

सुरजापुरी साहित्य को मिला मंच
महोत्सव के दौरान सुरजापुरी भाषा की कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें जगदीश य. राम उर्फ ‘मिराक’ का उपन्यास ‘सुरजापुर की माटी’, डॉ. पी.पी. सिन्हा (पूर्व) की लघुकथा ‘सबसे बोड़ो टाका’, राजकुमार शाह का गीत/काव्य संग्रह ‘हाल जोतवाजाही’ तथा मिली कुमारी की पुस्तक ‘पोरेर बेटी’ शामिल हैं। इन पुस्तकों को उपस्थित अधिकारियों को भेंट किया गया। साहित्यकारों ने इसे सुरजापुरी भाषा के साहित्यिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

एआई और संस्कृति का संगम
कार्यक्रम के दौरान डीएम और एसपी ने सुरजापुरी भाषा पर आधारित एआई स्टॉल का निरीक्षण किया। इसके अलावा सुरजापुरी कल्चरल स्टॉल, भाषा संबंधी पुस्तक स्टॉल तथा जीविका समूह द्वारा लगाए गए पारंपरिक खान-पान के स्टॉल का भी भ्रमण किया।
अधिकारियों ने सुरजापुरी पारंपरिक व्यंजन ‘भक्के’ का स्वाद लिया और स्थानीय व्यंजनों की सराहना की। साथ ही, सुरजापुरी विवाह परंपरा से जुड़े डोल-नगाड़ों की प्रदर्शनी ने आगंतुकों को क्षेत्रीय लोकजीवन की अनूठी झलक दिखाई।
सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त करने की पहल
पूरे आयोजन में सांस्कृतिक गौरव और एकता की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सुरजापुरी भाषा और लोकसंस्कृति की पहचान को सहेजना समय की मांग है।
प्रथम सुरजापुरी महोत्सव ने न केवल स्थानीय कलाकारों और साहित्यकारों को मंच प्रदान किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही समाज अपनी पहचान को सशक्त बना सकता है। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि यह महोत्सव आने वाले वर्षों में और भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।
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