पटना में उस समय राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाएं सामने आईं। जैसे ही यह खबर फैली, बड़ी संख्या में जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए मांग की कि नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहें और उन्हें दिल्ली नहीं भेजा जाए। प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता भावुक हो गए और रोते हुए नजर आए। उनका कहना था कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए वोट दिया है, इसलिए उन्हें राज्य छोड़कर केंद्र की राजनीति में नहीं जाना चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जेडीयू नेता संजय झा के खिलाफ नारे लगाए। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता ही नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ गया है।

इस दौरान जेडीयू विधायक प्रेम मुखिया को भी कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा। जैसे ही वे मुख्यमंत्री आवास के पास पहुंचे, प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और विरोध जताने लगे। स्थिति को देखते हुए प्रेम मुखिया को वहां से वापस लौटना पड़ा।

विरोध प्रदर्शन के चलते मुख्यमंत्री आवास के आसपास का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात किया गया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता भावुक होकर रो पड़ा और उसने कहा कि उन्होंने गांव-गांव और घर-घर जाकर नीतीश कुमार के नाम पर लोगों से वोट मांगा था। जनता ने भी उन पर भरोसा किया और उन्हें समर्थन दिया। ऐसे में अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली चले जाते हैं, तो कार्यकर्ताओं का भविष्य क्या होगा।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक पार्टी नेतृत्व या मुख्यमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस खबर के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
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