अररिया | अररिया जिले के फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास पर राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का पालन न करने का आरोप लगा है। यह मामला पार्टी और विधायक दोनों के लिए राजनीतिक संकट बन गया है।
राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने स्पष्ट निर्देश (व्हिप) जारी किया था, जिसमें सभी विधायकों को मतदान में भाग लेने और पार्टी के तय उम्मीदवारों को वोट देने को कहा गया था। हालांकि, मनोज विश्वास ने इस निर्देश की अवहेलना करते हुए मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया, जिससे पार्टी नेतृत्व और जनता में सवाल उठने लगे हैं।

फारबिसगंज में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष शाद अहमद ने कहा कि विधायक ने न केवल पार्टी के आदेशों की अनदेखी की है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी विश्वासघात किया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और अधिकारी लगातार विधायक से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद रहा और कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जिलाध्यक्ष ने इसे पार्टी अनुशासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ गंभीर कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि मनोज विश्वास द्वारा मतदान से दूर रहना न केवल कांग्रेस के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि यह जनादेश का भी अपमान है।
वहीं, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह घटना महागठबंधन और भाजपा के बीच राज्यसभा की सीटों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच और भी संवेदनशील हो गई है। मनोज विश्वास 2025 के विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज सीट पर कांग्रेस को जीत दिलाने में सफल रहे थे, जहां उन्होंने भाजपा के मजबूत गढ़ को तोड़कर 221 वोटों से जीत हासिल की थी। इस जीत के बाद उनके पार्टी और क्षेत्र में राजनीतिक महत्व में वृद्धि हुई थी।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और पार्टी ने संकेत दिया है कि विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिन्होंने सभी एक स्वर में कहा कि पार्टी अनुशासन और संगठन की गरिमा को बनाए रखने के लिए किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद विधायक के खिलाफ संभावित सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सदस्यता निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कदम शामिल हो सकते हैं। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में नए सियासी हलचल की आशंका जताई जा रही है।
यह मामला आगामी राज्यसभा चुनाव और बिहार की सियासत पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि महागठबंधन और भाजपा के बीच हर सीट के लिए कड़ा मुकाबला जारी है।
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