पूर्णिया। पूर्णिया यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की परीक्षा के दौरान एडमिट कार्ड में हुई गंभीर गड़बड़ी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। तकनीकी अव्यवस्था के कारण हजारों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए, जिसके बाद पूरे शहर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ही परीक्षा के लिए तीन अलग-अलग एडमिट कार्ड जारी कर दिए, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। छात्रों ने इसे देश में अभूतपूर्व लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब बड़ी संख्या में छात्र अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे, लेकिन एडमिट कार्ड में तिथियों के अंतर के कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। इससे नाराज छात्रों ने सड़क से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सामर्थ्य पोर्टल की तकनीकी खामियों को इस अव्यवस्था का मुख्य कारण बताया। गुस्साए छात्रों ने आरकेके कॉलेज परीक्षा केंद्र पर जमकर हंगामा किया और मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।

इसके बाद सैकड़ों की संख्या में छात्र विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचे और प्रशासनिक भवन का घेराव किया। छात्र नेता पीयूष पुजारा के नेतृत्व में छात्रों ने हाथों में एडमिट कार्ड लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन, सामर्थ्य पोर्टल और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन में छात्र नेता चाहत यादव भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।
छात्र जसीम आलम और छात्रा इमराना खातून ने बताया कि स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा 30 मार्च से 15 अप्रैल तक निर्धारित थी। शुरुआत में दो एडमिट कार्ड जारी किए गए और 30 मार्च व 4 अप्रैल को परीक्षाएं भी आयोजित की गईं। लेकिन बाद में तीसरा एडमिट कार्ड जारी कर परीक्षा तिथियों में बदलाव कर दिया गया।

नए एडमिट कार्ड के अनुसार 8 और 10 अप्रैल की परीक्षाएं बदलकर 9 और 11 अप्रैल कर दी गईं। इस अचानक हुए बदलाव की जानकारी समय पर छात्रों तक नहीं पहुंच पाई, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिन छात्रों की परीक्षा छूट गई है, उनके लिए जल्द ही नई तिथि घोषित की जाएगी। साथ ही आगामी सभी परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और तकनीकी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल पूरे मामले को लेकर छात्र-प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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