बिहार के कटिहार जिले में बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शहीद चौक पर सरमा का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।

जिला कांग्रेस के आह्वान पर हुआ प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन) के आह्वान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि असम मुख्यमंत्री द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई टिप्पणी असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का उपयोग है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
कांग्रेस नेताओं ने की कड़ी निंदा
जिलाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता के खिलाफ की गई टिप्पणी केवल व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सम्मान पर चोट है। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे एक अनुभवी और सम्मानित नेता हैं, जिनका राजनीतिक योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की भाषा का सार्वजनिक जीवन में कोई स्थान नहीं होना चाहिए और कांग्रेस पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है।

शहीद चौक पर पुतला दहन
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र कटिहार का शहीद चौक रहा, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का पुतला दहन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी की।
कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें पूर्व विधायक पूनम पासवान, राष्ट्रीय सचिव तौकीर आलम, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेम राय, संजय सिंह, दिलीप विश्वास, कांग्रेस प्रवक्ता पंकज कुमार तमाखुवाला और नगर अध्यक्ष रिंकू मिश्रा सहित कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस घटना के बाद कटिहार में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इसे सम्मान और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि स्थानीय स्तर पर इस प्रदर्शन ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
निष्कर्ष
फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर विरोध जारी रखने के संकेत दिए गए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
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