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महिला आरक्षण को लेकर बिहार की सियासत गरमाई

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पटना, बिहार। महिला आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर नारी शक्ति के अधिकारों के साथ “धोखा” किया गया है और उनके सम्मान का अपमान हुआ है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य और देशभर में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है और विभिन्न दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

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विपक्षी दलों पर सीएम का तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) सहित कई विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दलों का महिला आरक्षण को लेकर रुख “गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण” रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी हमेशा से महिला विरोधी मानसिकता के साथ राजनीति करती रही है।

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महिला नेताओं की मौजूदगी में दिया बयान

इस कार्यक्रम में कई प्रमुख महिला नेता भी उपस्थित थीं। इनमें जेडीयू की वरिष्ठ नेता लेसी सिंह, स्नेहलता कुशवाहा, बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दर्शना सिंह और विधायक ज्योति मांझी शामिल रहीं। इनकी मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

महिला आरक्षण लागू होने पर बढ़ती भागीदारी का दावा

सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि यदि महिला आरक्षण बिल पूरी तरह लागू हो जाता, तो लोकसभा और विधानसभा दोनों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होती। उन्होंने बिहार विधानसभा का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्तमान में 29 महिला विधायक हैं, जबकि आरक्षण लागू होने की स्थिति में यह संख्या बढ़कर 122 तक पहुंच सकती थी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे नीति-निर्माण में महिलाओं की भूमिका और मजबूत होती।

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पंचायत स्तर पर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि बिहार में पहले से ही पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू है, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। इसके कारण ग्रामीण स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है।

राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ी हलचल

महिला आरक्षण को लेकर दिए गए इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां सत्ता पक्ष इसे महिला सशक्तिकरण का मजबूत कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को उछालने का आरोप लगा सकता है।

फिलहाल यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी की संभावना जताई जा रही है।

अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.

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