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कटिहार अधूरे पुल: करोड़ों खर्च के बाद भी ग्रामीणों का इंतजार जारी, प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा

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कटिहार अधूरे पुल: कटिहार जिले के प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पुल की सुविधा का इंतजार है। यहां दो बड़े पुल निर्माणाधीन हैं, जो स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ सरकारी परियोजनाएं नहीं, बल्कि बेहतर आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी उम्मीदें हैं। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी दोनों पुल अधूरे पड़े हैं।

इन अधूरे पुलों की वजह से हजारों ग्रामीण आज भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। नदी और जलभराव के कारण लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या जोखिम उठाकर पुराने रास्तों से गुजरना पड़ता है।

पहला मामला मादानशाही इलाके की घोघरा नदी पर बन रहे पुल का है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस पुल के निर्माण की शुरुआत 14 मार्च 2024 को हुई थी। करीब 15.38 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पुल को वर्ष 2025 तक पूरा किया जाना था। लेकिन तय समय सीमा गुजरने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है।

कटिहार अधूरे पुल
कटिहार अधूरे पुल

ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से आसपास के कई गांवों को सीधा फायदा मिलता। लोगों को आवागमन में आसानी होती और बारिश के दिनों में नदी पार करने की समस्या खत्म हो जाती। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि निर्माण अधूरा होने के कारण लोगों को पहले की तरह ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरा मामला बिसारे गांव का है। यहां करीब 2.42 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण का काम वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। योजना के अनुसार इसे 2022 तक पूरा हो जाना था। लेकिन समय बीतने के बाद भी पुल अधूरा है और ग्रामीणों की उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों को लेकर हर चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। चुनाव के दौरान निर्माण कार्यों में तेजी दिखाई देती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद काम की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि मशीनें और मजदूर कुछ समय बाद गायब हो जाते हैं और अधूरी परियोजनाएं लंबे समय तक लटकी रहती हैं।

कटिहार अधूरे पुल
कटिहार अधूरे पुल

ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी बरसात और बाढ़ के दौरान सामने आती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है और किसानों को अपनी फसल से जुड़े कामों के लिए भी जोखिम उठाना पड़ता है।

कई ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। आपात स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि खराब रास्तों और जलभराव के कारण समय पर मदद पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

कटिहार अधूरे पुल
कटिहार अधूरे पुल

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाई, लेकिन अब तक निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आई। लोगों की मांग है कि दोनों पुलों का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि उन्हें वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिल सके।

मामला अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने दोनों पुलों की स्थिति की जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर नए सिरे से प्रक्रिया अपनाकर निर्माण कार्य को पूरा कराया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि अधूरी परियोजनाओं को जल्द पूरा कर जनता को इसका लाभ दिलाया जाए।

कटिहार अधूरे पुल
कटिहार अधूरे पुल

हालांकि, ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया कब पूरी होगी और पुलों का निर्माण वास्तव में कब तक पूरा हो पाएगा। क्योंकि वर्षों से इंतजार कर रहे लोगों के लिए अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम की जरूरत है।

कटिहार के ये दोनों अधूरे पुल सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को दिखाते हैं। करोड़ों रुपये की लागत वाली ये परियोजनाएं अगर समय पर पूरी हो जातीं तो हजारों लोगों का जीवन आसान हो सकता था। अब लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है और उम्मीद है कि जल्द ही यह अधूरी विकास कहानी पूरी हो सकेगी।

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