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पूर्णिया मैराथन: पूर्णिया मैराथन में उमड़ा युवाओं का जनसैलाब, अव्यवस्था के चलते रुके नतीजे, अब वीडियो जांच से होंगे विजेताओं का चयन

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पूर्णिया मैराथन: बिहार के पूर्णिया जिले में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ मैराथन रविवार को उत्साह, ऊर्जा और युवाओं की भागीदारी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई। हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं और युवाओं ने इस आयोजन में हिस्सा लेकर न केवल अपनी फिटनेस और खेल भावना का प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि युवाओं के बीच खेल और सामाजिक आयोजनों को लेकर जबरदस्त उत्साह मौजूद है। हालांकि, मैराथन का समापन उस समय विवादों और अव्यवस्था के कारण चर्चा का विषय बन गया, जब फिनिशिंग प्वाइंट पर भारी भीड़ के चलते विजेताओं की घोषणा रोकनी पड़ी। अब आयोजन समिति ने साफ कर दिया है कि पूरे आयोजन के लाइव वीडियो और रिकॉर्ड किए गए विजुअल की जांच के बाद ही शीर्ष 25 विजेताओं के नाम आधिकारिक रूप से घोषित किए जाएंगे।

पूर्णिया मैराथन
पूर्णिया मैराथन

यह मैराथन पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन, जिन्हें पप्पू यादव के नाम से भी जाना जाता है, की पहल पर आयोजित की गई थी। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को खेल, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के प्रति प्रेरित करना था। इस आयोजन में केवल पूर्णिया जिले के ही नहीं, बल्कि कटिहार, अररिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जैसे आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में प्रतिभागी पहुंचे। आयोजकों के अनुसार, इस मैराथन में 10 हजार से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया, जिससे यह क्षेत्र के सबसे बड़े खेल आयोजनों में शामिल हो गया।

रविवार सुबह से ही शहर का माहौल पूरी तरह खेलमय नजर आया। प्रतिभागी निर्धारित समय से पहले ही आयोजन स्थल पर पहुंचने लगे थे। युवाओं के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कई प्रतिभागी अपने दोस्तों और परिवार के साथ पहुंचे थे, जबकि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस आयोजन को देखने के लिए रास्तों और प्रमुख चौक-चौराहों पर मौजूद रहे। लोगों ने पूरे जोश के साथ धावकों का उत्साहवर्धन किया और तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।

करीब सात किलोमीटर लंबी इस मैराथन की शुरुआत ततमा टोली ठाकुरबाड़ी मैदान से हुई। यहां से धावकों का कारवां रजनी चौक, लाइन बाजार, पंचमुखी मंदिर चौक, फोर्ड कंपनी चौक, आस्था मंदिर, आर.एन. शाह चौक, समाहरणालय, नगर निगम चौक, कला भवन रोड, थाना चौक और गिरजा चौक होते हुए इंदिरा गांधी स्टेडियम पहुंचा। यह पूरा मार्ग शहर के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरता है, इसलिए रास्ते में हजारों लोग मैराथन को देखने और प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाने के लिए मौजूद रहे।

पूर्णिया मैराथन
पूर्णिया मैराथन

शुरुआती चरण में आयोजन पूरी तरह व्यवस्थित दिखाई दिया। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और स्वयंसेवकों की तैनाती के कारण धावकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। लेकिन जैसे-जैसे सभी प्रतिभागी फिनिशिंग प्वाइंट यानी इंदिरा गांधी स्टेडियम की ओर पहुंचे, वहां भीड़ का दबाव अचानक बहुत अधिक बढ़ गया। हजारों धावकों और दर्शकों के एक साथ पहुंचने से स्टेडियम परिसर में अव्यवस्था फैल गई।

स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण हो गई कि आयोजन समिति और सुरक्षा कर्मियों के लिए भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। फिनिशिंग लाइन के पास भारी भीड़ के कारण यह तय करना कठिन हो गया कि कौन-सा धावक किस स्थान पर पहुंचा है। शुरुआती कुछ प्रतिभागियों की पहचान तो हो गई, लेकिन उसके बाद लगातार बढ़ती भीड़ और अफरा-तफरी के कारण निष्पक्ष परिणाम घोषित करना संभव नहीं रहा।

इसी स्थिति को देखते हुए निर्णायक मंडल और आयोजन समिति ने तत्काल प्रभाव से परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया रोक दी। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रतिभागी के साथ अन्याय नहीं होने देना है। यदि मौके पर जल्दबाजी में परिणाम घोषित किए जाते, तो कई योग्य प्रतिभागियों के साथ गलत हो सकता था। इसलिए पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता देते हुए परिणाम स्थगित करने का फैसला लिया गया।

आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि मैराथन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए कैमरों, ड्रोन फुटेज और लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग की विस्तार से जांच की जाएगी। तकनीकी टीम सभी विजुअल का विश्लेषण करेगी, ताकि फिनिशिंग लाइन पार करने वाले प्रतिभागियों की सही पहचान की जा सके। जांच पूरी होने के बाद शीर्ष 25 विजेताओं की सूची जारी की जाएगी।

समिति का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से निष्पक्ष परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे। वीडियो फुटेज की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि किस प्रतिभागी ने किस समय फिनिशिंग लाइन पार की और उसका वास्तविक स्थान क्या था। इससे किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी और प्रतिभागियों का भरोसा भी बना रहेगा।

पूर्णिया मैराथन
पूर्णिया मैराथन

इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखाया कि बिहार के युवाओं में खेलों को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि यदि बेहतर खेल आयोजन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो राज्य से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के पहुंचने के कारण भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े खेल आयोजनों में प्रतिभागियों की संख्या के अनुसार प्रवेश और निकास की अलग-अलग व्यवस्था, डिजिटल टाइमिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक चिप आधारित ट्रैकिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे कदम भविष्य में ऐसी स्थितियों को रोक सकते हैं। इससे आयोजन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न होगा।

फिलहाल सभी प्रतिभागियों और दर्शकों की नजर आयोजन समिति की अगली घोषणा पर टिकी हुई है। सभी को उम्मीद है कि वीडियो जांच जल्द पूरी होगी और निष्पक्ष तरीके से विजेताओं के नाम घोषित किए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद पूर्णिया मैराथन ने युवाओं के जोश, खेल भावना और सामाजिक भागीदारी की एक मजबूत तस्वीर पेश की है। अब देखना होगा कि तकनीकी जांच के बाद किन धावकों को शीर्ष 25 में स्थान मिलता है और किसके सिर जीत का ताज सजता है।

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