मोतीबाग कचरा: शहर के मोतीबाग इलाके में खुले में ठोस कचरा डंप करने और कचरा जलाए जाने से होने वाले प्रदूषण की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, कोलकाता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण के इस आदेश के बाद अब मोतीबाग में कचरा निस्तारण और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों की जांच का रास्ता साफ हो गया है।
मामला मोहम्मद अंसार खान की ओर से दायर मूल आवेदन संख्या 100/2026/EZ से जुड़ा है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि किशनगंज शहर के मोतीबाग इलाके में घनी आबादी के बीच खुले में ठोस कचरा डंप किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इलाके में जमा किए जा रहे कचरे का उचित तरीके से निस्तारण नहीं किया जाता और कई बार कचरे में आग लगा दी जाती है।
शिकायत के अनुसार, कचरे में प्लास्टिक, रबर और अन्य ऐसे पदार्थ भी शामिल होते हैं, जिन्हें खुले में जलाने से जहरीला धुआं और प्रदूषक तत्व वातावरण में फैल सकते हैं। इसके अलावा जैव-चिकित्सा अपशिष्ट जलाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। स्थानीय स्तर पर इस तरह की गतिविधियों से आसपास रहने वाले लोगों को धुएं, दुर्गंध और प्रदूषण से परेशानी होने की बात कही गई है।
NGT ने मामले की प्रारंभिक जानकारी और लगाए गए आरोपों को देखते हुए माना कि इसमें पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यायाधिकरण ने केवल संबंधित पक्षों से जवाब लेने के बजाय स्थल की वास्तविक स्थिति का मौके पर जाकर सत्यापन कराने का निर्देश दिया है।

संयुक्त समिति करेगी स्थल का निरीक्षण
NGT के आदेश के तहत एक संयुक्त समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी BSPCB और किशनगंज जिला प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को मामले की जांच के लिए आवश्यक समन्वय के साथ काम करना होगा।
BSPCB को इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसका मतलब है कि समिति की बैठक, स्थल निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने जैसी गतिविधियों के समन्वय की प्रमुख जिम्मेदारी बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी।
न्यायाधिकरण ने समिति को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर बैठक करे। इसके बाद समिति को मोतीबाग स्थित संबंधित स्थल का निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी और मौके पर मौजूद वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा।
समिति संबंधित विभागों और अन्य पक्षों से भी बातचीत करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि इलाके में कचरा किस तरह जमा किया जा रहा है, उसका निस्तारण कैसे हो रहा है और क्या कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वास्तव में हो रही हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वहां पर्यावरणीय मानकों और कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
एक महीने में देनी होगी रिपोर्ट
स्थल निरीक्षण और तथ्यों के सत्यापन के बाद संयुक्त समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। NGT ने समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट न्यायाधिकरण के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट में मौके की स्थिति के साथ-साथ आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के संबंध में सुझाव भी देने होंगे। यानी समिति सिर्फ शिकायतों की पुष्टि या खंडन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यदि किसी तरह की पर्यावरणीय समस्या सामने आती है तो उसके समाधान के लिए जरूरी कदमों की सिफारिश भी करेगी।
इस रिपोर्ट को मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि मोतीबाग में कचरा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति क्या है और शिकायत में लगाए गए प्रदूषण संबंधी आरोप कितने सही हैं।

किन विभागों से मांगा गया जवाब?
इस मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव, किशनगंज के जिला आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद किशनगंज को प्रतिवादी बनाया गया है।
NGT ने सभी संबंधित प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायाधिकरण की ओर से मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है।
17 अगस्त को संबंधित पक्षों को सुनवाई की सूचना भी जारी की गई थी। अब अगली सुनवाई से पहले संयुक्त समिति की जांच और उसकी रिपोर्ट पर विशेष नजर रहेगी।
स्थानीय लोगों की शिकायतों पर भी रहेगा फोकस
मोतीबाग क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका बताया गया है। ऐसे में खुले में कचरा जमा होने और उसे जलाए जाने की शिकायत स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर प्लास्टिक और रबर जैसे पदार्थों को जलाने से निकलने वाले धुएं को लेकर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति का अंतिम आकलन संयुक्त समिति के स्थल निरीक्षण और जांच के बाद ही हो सकेगा। समिति को शिकायतकर्ता से भी जानकारी लेने और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया गया है। इससे जांच प्रक्रिया में अलग-अलग पक्षों का पक्ष सामने आने की संभावना है।
NGT के आदेश से यह भी संकेत मिलता है कि ठोस कचरे के प्रबंधन और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर जिम्मेदार एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जा सकता है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

अब रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मोतीबाग कचरा डंपिंग मामले में सबसे अहम अगला कदम संयुक्त समिति का स्थल निरीक्षण है। दो सप्ताह के भीतर समिति की बैठक और उसके बाद मौके की जांच की प्रक्रिया शुरू होनी है। इसके बाद एक महीने के भीतर रिपोर्ट NGT के सामने रखी जाएगी।
रिपोर्ट में कचरा निस्तारण की व्यवस्था, खुले में कचरा डंप करने की स्थिति, कचरा जलाने के आरोप और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े तथ्यों का उल्लेख होने की उम्मीद है। साथ ही समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय भी सुझाए जा सकते हैं।
30 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले की प्रगति पर चर्चा हो सकती है। ऐसे में अब स्थानीय प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद की कार्रवाई के साथ-साथ संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।
NGT के आदेश के बाद मोतीबाग में कचरा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे को लेकर जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ गई है। आने वाले दिनों में स्थल निरीक्षण और समिति की रिपोर्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि शिकायतों की वास्तविकता क्या है और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए किन कदमों की जरूरत है।










