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कटिहार डॉक्टर्स डे: कटिहार मेडिकल कॉलेज में मानव श्रृंखला: बेहतर स्वास्थ्य सेवा का संकल्प, चिकित्सकों का सम्मान

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कटिहार डॉक्टर्स डे: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर कटिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बुधवार को एक प्रेरणादायक और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉक्टरों, रेजिडेंट चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों और मेडिकल स्टाफ ने मानव श्रृंखला बनाकर समाज को स्वास्थ्य सेवा, मानवता और चिकित्सा के प्रति समर्पण का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों को सम्मानित किया गया और सभी ने मरीजों को बेहतर, संवेदनशील तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का सामूहिक संकल्प भी लिया। यह आयोजन केवल डॉक्टर्स डे मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण, सामाजिक जिम्मेदारी और जनस्वास्थ्य के प्रति डॉक्टरों की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता नजर आया।

यह कार्यक्रम कटिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कुलाधिपति डॉ. अहमद अशफाक करीम के मार्गदर्शन तथा अस्पताल अधीक्षक सह विभागाध्यक्ष डॉ. सीबा हुसैन के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, वरिष्ठ चिकित्सक, विशेषज्ञ डॉक्टर, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, जूनियर चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक साथ मानव श्रृंखला बनाकर यह संदेश दिया कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

कटिहार डॉक्टर्स डे
कटिहार डॉक्टर्स डे

मानव श्रृंखला के दौरान उपस्थित डॉक्टरों ने एकजुट होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को दोहराया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर का कर्तव्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज और उसके परिवार को भरोसा देना, सही मार्गदर्शन करना और हर परिस्थिति में संवेदनशीलता के साथ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी है। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों ने मरीजों के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अस्पताल अधीक्षक सह विभागाध्यक्ष डॉ. सीबा हुसैन ने कहा कि डॉक्टर का जीवन सेवा, त्याग और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार किसी सम्मान या पुरस्कार से अधिक मरीज की मुस्कान और उसके स्वस्थ होकर घर लौटने की खुशी होती है। उन्होंने सभी डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे अपने पेशे की गरिमा बनाए रखते हुए मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार करें और हर व्यक्ति को समान भाव से उपचार उपलब्ध कराएं।

डॉ. सीबा हुसैन ने यह भी कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में तकनीक और संसाधनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध सबसे अधिक मायने रखता है। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सक सेवा भावना के साथ कार्य करते हैं, तब अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास का स्थान बन जाता है।

कार्यक्रम के दौरान कुलाधिपति डॉ. अहमद अशफाक करीम का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। उन्होंने अपने संदेश में चिकित्सकों को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि डॉक्टर हर परिस्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात मरीजों की सेवा की। महामारी के दौरान हजारों चिकित्सकों ने अपने परिवार से दूर रहकर मानवता की रक्षा के लिए जो योगदान दिया, वह देश कभी नहीं भूल सकता।

कटिहार डॉक्टर्स डे
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उन्होंने कहा कि कोविड काल ने यह साबित कर दिया कि डॉक्टर केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज की सुरक्षा और जीवन रक्षा की सबसे मजबूत कड़ी हैं। ऐसे में चिकित्सकों का सम्मान करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने सभी डॉक्टरों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने की अपील की।

इस अवसर पर चिकित्सकों को उनके उत्कृष्ट योगदान और चिकित्सा सेवा के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन डॉक्टरों का दायित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा चिकित्सकों को ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की सलाह दी।

मानव श्रृंखला में शामिल सभी डॉक्टरों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाला प्रत्येक मरीज सम्मान और बेहतर उपचार का अधिकार रखता है। इसलिए चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, आधुनिक और मरीज-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम में कोसी-सीमांचल क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि कटिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल इस पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की जिम्मेदारी केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, जागरूकता और भरोसा देना भी है।

वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय के साथ चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों का विस्तार हो रहा है। इसलिए डॉक्टरों को लगातार नई जानकारी और प्रशिक्षण से खुद को अपडेट रखना होगा, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा सेवा में तकनीक जितनी आवश्यक है, उतनी ही जरूरी मानवीय संवेदनाएं भी हैं।

कटिहार डॉक्टर्स डे
कटिहार डॉक्टर्स डे

कार्यक्रम में उपस्थित फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, जूनियर चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी मरीजों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम चिकित्सा सेवा के प्रति सम्मान, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक बनकर सामने आया। मानव श्रृंखला के माध्यम से डॉक्टरों ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में सभी चिकित्सकों ने मरीजों की सेवा में दिन-रात समर्पित रहने, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

कटिहार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आयोजित यह आयोजन न केवल डॉक्टर्स डे का उत्सव था, बल्कि समाज और चिकित्सकों के बीच विश्वास, सेवा और समर्पण के रिश्ते को और मजबूत करने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। इससे यह संदेश गया कि डॉक्टरों का योगदान केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज के स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं।

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