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पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन में देरी से छात्र आक्रोशित

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पूर्णिया यूनिवर्सिटी में पीएचडी नामांकन को लेकर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा है। PET 2023 परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बावजूद जब नामांकन की प्रक्रिया आरंभ नहीं की गई, तो नाराज छात्रों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। विश्वविद्यालय परिसर में हो रहे इस विरोध प्रदर्शन को छात्र संगठनों और यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है।

पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन में देरी से छात्र आक्रोशित
पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन में देरी से छात्र आक्रोशित

नामांकन प्रक्रिया में देरी से नाराज छात्र बोले- यह अन्याय बर्दाश्त नहीं

अनशन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता राजा कुमार का कहना है कि जब तक PET नामांकन को लेकर कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई हमारे हक और अधिकार की है। हम सुस्त और असंवेदनशील सिस्टम के खिलाफ आखिरी सांस तक संघर्ष करेंगे।”

राजा कुमार के अनुसार, PET 2023 की परीक्षा उत्तीर्ण हुए महीनों हो गए हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब तक नामांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। छात्रों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और कुलपति की हठधर्मिता के कारण योग्य छात्र पीएचडी में प्रवेश से वंचित हैं।

पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन में देरी से छात्र आक्रोशित
पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन में देरी से छात्र आक्रोशित

प्रशासन ने दिया मौखिक आश्वासन, छात्रों ने किया अस्वीकार

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. पवन कुमार झा और डॉ. पटवारी यादव अनशन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों को समस्या के समाधान का मौखिक आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने इसे नकारते हुए कहा कि अब केवल लिखित और ठोस निर्णय ही स्वीकार्य होगा।

कुलपति पर गंभीर आरोप: ‘हर सवाल पर नाराज हो जाते हैं’

छात्रों का कहना है कि वर्तमान कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह के कार्यभार संभालने के बाद से ही नामांकन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। छात्र प्रदीप कुमार, विनीत कुमार और डीएम कुमार ने कहा कि कुलपति से जब भी नामांकन को लेकर बात की जाती है, तो वह गुस्से में आ जाते हैं या कह देते हैं कि यह छात्र यूनिवर्सिटी के नहीं हैं।

“नामांकन की प्रक्रिया 50 दिन पहले ही पूरी हो सकती थी, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि अभी मुझे आए हुए ज़्यादा दिन नहीं हुए हैं। हम जब समस्याएं रखते हैं तो प्रशासन का रवैया टालमटोल वाला रहता है,” छात्रों ने कहा।

पुराने अनुभव भी दिला रहे मायूसी

छात्रों ने यह भी बताया कि यूनिवर्सिटी का ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही चिंताजनक रहा है। PET 2020 के दौरान छात्रों से आवेदन शुल्क लेकर परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी। उस समय भी छात्रों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद 2022 में परीक्षा करवाई गई। लेकिन इसके बावजूद बहुत ही सीमित छात्रों को पीएचडी में एडजस्ट किया गया।

अब PET 2024 की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी थी, लेकिन छात्रों का आरोप है कि इसे बिना किसी स्पष्ट कारण के रोक दिया गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर दोहरी मार

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का यह भी कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। एक ओर नामांकन न होने से उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में है, दूसरी ओर लगातार आवेदन, दस्तावेज़, और यूनिवर्सिटी चक्कर लगाने में आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

क्या कहता है विश्वविद्यालय प्रशासन?

यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है। मौखिक आश्वासन के अतिरिक्त कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण छात्रों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है।


निष्कर्ष:

पूर्णिया यूनिवर्सिटी में PET नामांकन को लेकर चल रहा यह छात्र आंदोलन एक गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक संकट का संकेत दे रहा है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है और विश्वविद्यालय की साख पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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