किशनगंज जिले में प्रस्तावित सैनिक स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों और किसानों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। शकोर, नटवापारा, सतभुट्टा और कन्याबरी मौजा में करीब 250 एकड़ भूमि अधिग्रहण की चर्चा के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

कोचाधामन के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोग सैनिक स्टेशन के विरोध में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मुख्य चिंता उनकी आजीविका को लेकर है, क्योंकि प्रस्तावित भूमि चारों ओर से घनी आबादी और गांवों से घिरी हुई है। इस जमीन पर छोटे और सीमांत किसान वर्षों से खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और यही उनकी आय का एकमात्र साधन है।

पूर्व विधायक ने बताया कि यदि इस उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया, तो बड़ी संख्या में किसान आजीविका के संकट और विस्थापन की समस्या से जूझने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के आसपास पर्याप्त मात्रा में बंजर भूमि और सरकारी जमीन उपलब्ध है, जिसे सैनिक स्टेशन के लिए चिन्हित किया जा सकता है। इससे न तो राष्ट्रीय परियोजना प्रभावित होगी और न ही किसानों की रोजी-रोटी छिनेगी।

इसी मांग को लेकर ग्रामीणों की ओर से जिला पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें वैकल्पिक भूमि के चयन पर विचार करने का आग्रह किया गया है। मास्टर मुजाहिद आलम ने जिला पदाधिकारी से हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि यह मामला सीधे तौर पर रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना से जुड़ा हुआ है, इसलिए अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाएगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगा और ऐसा संतुलित फैसला लिया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के साथ-साथ स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के हितों की भी रक्षा हो सके।
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