पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किशनगंज से AIMIM विधायक और बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेटियों की सुरक्षा को लेकर केवल नारेबाजी कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है।
अख्तरुल ईमान ने कहा कि सरकार “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” का नारा बड़े पैमाने पर प्रचारित करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य में बेटियों का सबसे अधिक शोषण हो रहा है। उन्होंने इस नारे को पूरी तरह खोखला करार दिया।

विधायक ईमान ने NEET अभ्यर्थी की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि अब तक इस प्रकरण में कितने पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया, कितनी गिरफ्तारियां हुईं और कितने दोषियों को सजा मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस संवेदनशील मामले को “बेशर्मी से दबाने” का प्रयास कर रही है, जबकि जांच के दौरान धीरे-धीरे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

उन्होंने खुलासा किया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर वीर्य के निशान पाए गए हैं, इसके बावजूद अब तक की कार्रवाई नाकाफी और औपचारिक नजर आ रही है। अख्तरुल ईमान ने कहा, “जो अधिकारी निलंबित किए गए हैं, वे केवल निचले स्तर के पदाधिकारी हैं। बड़े अफसर कहां हैं? बड़ी मछलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?” उनका आरोप है कि ऐसे मामलों को दबाने में उच्च स्तर के पुलिस अधिकारियों की भूमिका होती है।

गौरतलब है कि यह मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक हॉस्टल से जुड़ा है, जहां NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच में लापरवाही सामने आने के बाद चित्रगुप्त नगर थाने की SHO रोशनी कुमारी और कदमकुआं थाने के अतिरिक्त SHO हेमंत झा को निलंबित किया गया था। बाद में फॉरेंसिक जांच में यौन शोषण के संकेत मिलने से मामला और गंभीर हो गया, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
अख्तरुल ईमान ने राज्य सरकार से मांग की कि यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है और अपराध पर नियंत्रण चाहती है, तो उसे दोषियों को बचाने के बजाय उन्हें सामने लाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक बड़े स्तर के पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
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