किशनगंज: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान रविवार को एक दिवसीय दौरे पर किशनगंज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने तौहीद एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित इमाम बुखारी यूनिवर्सिटी के 31वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को सफलता, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर प्रेरक संदेश दिया।

राज्यपाल शनिवार की शाम अररिया के रास्ते किशनगंज पहुंचे थे, जहां उन्होंने बीएसएफ गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम किया। रविवार सुबह कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच वे एमजीएम मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां बिहार सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इसके पश्चात राज्यपाल विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे, जहां भव्य दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि शिक्षा समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र और समाज के विकास में करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि देश तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है और आने वाला समय युवाओं की भूमिका से तय होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य रखा गया है, उसे साकार करने में वर्तमान पीढ़ी का सबसे बड़ा योगदान होगा। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अभी से खुद को मानसिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से तैयार करें।
एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक सोच और रचनात्मक प्रयास जरूरी हैं, न कि अनावश्यक विवाद और निरर्थक चर्चाएं।

इस अवसर पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल, किशनगंज विधायक कमरुल होदा सहित कई जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। राज्यपाल के आगमन को लेकर जिले में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

राज्यपाल का यह दौरा सीमांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और शैक्षणिक संस्थानों को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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