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किशनगंज खनन विभाग में रिश्वत का भंडाफोड़

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किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले में खनन विभाग में कथित रूप से चल रहे रिश्वतखोरी के खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार की मुख्यालय टीम ने ट्रैक्टर के रिलीज ऑर्डर के बदले 15 हजार रुपये की घूस लेते हुए जिला खनन कार्यालय के दो कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

किशनगंज खनन विभाग में रिश्वत का भंडाफोड़
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शिकायत से ट्रैप तक की पूरी कहानी

मामले की शुरुआत चकला निवासी हबीब आलम की शिकायत से हुई। उन्होंने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो में आरोप लगाया था कि खनन विभाग द्वारा जब्त किए गए उनके ट्रैक्टर को छोड़ने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की जा रही है।

निगरानी टीम ने पहले शिकायत का सत्यापन किया। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद 16 फरवरी 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 020/26 दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में एक विशेष धावादल का गठन कर ट्रैप की योजना बनाई गई।

किशनगंज खनन विभाग में रिश्वत का भंडाफोड़
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अलग-अलग जगह तय की गई थी घूस की वसूली

17 फरवरी को जाल बिछाया गया। योजना के तहत रिश्वत की रकम अलग-अलग स्थानों पर लेने की रणनीति बनाई गई थी ताकि किसी को संदेह न हो।

कार्रवाई के दौरान लिपिक अशोक कुमार चौधरी को जिला खनन कार्यालय के समीप 8,000 रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया। वहीं कार्यालय परिचारी सरोज कुमार सिंह को डुमरिया मोड़ स्थित एक चाय दुकान से 7,000 रुपये लेते हुए दबोच लिया गया।

निगरानी टीम ने दोनों को मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।

किशनगंज खनन विभाग में रिश्वत का भंडाफोड़
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न्यायालय में पेशी और आगे की कार्रवाई

दोनों आरोपियों को पूछताछ के बाद विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की विस्तृत जांच जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तरह की वसूली लंबे समय से चल रही थी और इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता है या नहीं।

उठ रहे हैं कई बड़े सवाल

इस घटना के बाद खनन विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं—

  • क्या ट्रैक्टर रिलीज जैसे नियमित प्रशासनिक कार्य के लिए आम नागरिकों से लगातार वसूली की जा रही थी?
  • क्या विभागीय अधिकारियों को इस कथित वसूली की जानकारी नहीं थी?
  • क्या यह केवल दो कर्मचारियों का मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था?
  • क्या जिला प्रशासन विभागीय जांच और निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई करेगा?
  • क्या भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ट्रैक्टर रिलीज और अन्य प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा?

फिलहाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल माना जा रहा है। अब निगाहें प्रशासनिक कदमों और आगे की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस मामले की जड़ें कितनी गहरी हैं।

अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.

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