अररिया जिले की बांसवारी पंचायत में सब्जी की खेती स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। यहां के अधिकांश परिवार अपनी आजीविका के लिए सब्जी उत्पादन पर ही निर्भर हैं। बांसवारी में उगाई जाने वाली ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियां

क्षेत्र में मौसम के अनुसार विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जाती है। सर्दियों के मौसम में फूलगोभी, बंदगोभी, पालक, मेथी, सरसों का साग और भिंडी जैसी हरी सब्जियां बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। वहीं गर्मियों में खीरा, करेला, नेनुआ, कद्दू और लौकी जैसी बेलदार सब्जियों का उत्पादन होता है। इस खेती ने गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं और कई परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।
करीब दस वर्षों से सब्जी की खेती कर रहे किसान सिकंदर कुमार मंडल बताते हैं कि इलाके के अधिकांश लोग इसी खेती पर निर्भर हैं। उनके अनुसार सर्दियों में फूलगोभी, बंदगोभी और भिंडी की खेती की जाती है, जबकि गर्मी के मौसम के लिए अभी करेला, खीरा और नेनुआ की खेती की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि खेतों में बांस गाड़कर ‘अलान’ बनाया जाता है, जिसके नीचे साग की खेती भी की जाती है। यह साग लगभग एक महीने में तैयार हो जाता है, जिससे किसानों को जल्दी आय का स्रोत मिल जाता है।

हालांकि अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिकतर किसान अपनी उपज थोक विक्रेताओं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘पैकार’ कहा जाता है, को ही बेच देते हैं। ये पैकार खेतों से ही सब्जियां कम दाम पर खरीद लेते हैं। सब्जियां जल्दी खराब होने वाली होती हैं और भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरी में तुरंत बिक्री करनी पड़ती है, जिससे उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता।
कुछ किसान खुद बाजार जाकर खुदरा बिक्री करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसे किसानों की संख्या बहुत कम है। किसानों का कहना है कि यदि क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज या भंडारण की उचित व्यवस्था हो जाए तो वे अपनी उपज को सुरक्षित रखकर बेहतर दाम मिलने तक इंतजार कर सकते हैं। इससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी और सब्जी उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा।
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