किशनगंज शहर के हलीम चौक के पास स्थित सेंट जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल एक बार फिर विवादों में आ गया है। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वह खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए री-एडमिशन, मेंटेनेंस और अन्य शुल्कों के नाम पर हर साल हजारों रुपये वसूल रहा है। इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय अभिभावक मोहम्मद मोइनुद्दीन ने बताया कि नियमानुसार नामांकन शुल्क केवल एक बार लिया जाना चाहिए, लेकिन स्कूल द्वारा हर वर्ष री-एडमिशन के नाम पर यह शुल्क फिर से वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर है और इस तरह की बार-बार फीस वसूली से अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अभिभावकों की शिकायत यहीं तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की किताबें खरीदने के लिए एक विशेष दुकान को ही अनिवार्य कर रहा है। बाजार में अन्य कहीं किताबें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे अभिभावकों को मजबूरन उसी निर्धारित दुकान से ऊंची कीमत पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।

बताया जा रहा है कि सेंट जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल एक अल्पसंख्यक, गैर-सहायता प्राप्त संस्थान है, जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फीस और किताबों के नाम पर मनमानी कर रहा है। हालांकि जब इस संबंध में स्कूल के प्रिंसिपल से बात की गई तो उन्होंने इन आरोपों को अलग तरीके से पेश किया। उनका कहना था कि बच्चों में बढ़ती अनुशासनहीनता को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, जैसे गार्ड आदि की नियुक्ति की गई है, जिसके चलते कुछ अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है।

इस पूरे मामले पर जिला पदाधिकारी विशाल राज ने स्पष्ट किया कि निजी विद्यालयों को लेकर प्रशासन द्वारा पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल को दोबारा नामांकन शुल्क लेने की अनुमति नहीं है और यदि ऐसा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने के आरोपों से घिरे इस विद्यालय के खिलाफ प्रशासन क्या कदम उठाता है और अभिभावकों को कब तक राहत मिलती है।
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