बिहार के कटिहार में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सोमवार को उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पूरे जिले में धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

राजेंद्र स्टेडियम से निकली भव्य शोभायात्रा
‘आरक्षण बढ़ाओ संविधान बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले शहर के राजेंद्र स्टेडियम से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। पूरे शहर में ‘जय भीम’ के नारों की गूंज सुनाई दी, जिससे वातावरण पूरी तरह अंबेडकरमय हो गया।

झांकियों ने खींचा लोगों का ध्यान
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण आकर्षक झांकियां रहीं। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को संविधान की पुस्तक के साथ दर्शाया गया, जो उनके योगदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही थी। इसके साथ ही समाज सुधारक ज्योतिबा फुले के जीवन और विचारों को भी झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया।
शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी रैली
यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—शहीद चौक, जेपी चौक, वीर जवान चौक और मिर्ची बड़ी चौक से होते हुए अंबेडकर चौक पहुंची। पूरे रास्ते में लोगों ने जगह-जगह फूल बरसाकर और जयकारों के साथ रैली का स्वागत किया।
अंबेडकर चौक पर श्रद्धांजलि
अंबेडकर चौक पहुंचकर प्रतिभागियों ने बाबा साहेब की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

सामाजिक न्याय और शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने बाबा साहेब के प्रसिद्ध संदेश—‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’—को आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया।
‘ज्ञान दिवस’ और ‘समानता दिवस’ के रूप में आयोजन
इस अवसर को ‘ज्ञान दिवस’ और ‘समानता दिवस’ के रूप में भी मनाया गया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा है, और उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।
एकता और जागरूकता का संदेश
यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश भी देता नजर आया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह साबित किया कि बाबा साहेब के विचार आज भी जन-जन में जीवित हैं।
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